
Last updated: August 14th, 2026 at 03:42 pm
जबलपुर के अलग-अलग थानों में दर्ज आपराधिक मामलों और एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया
दुबई में रह रहे कारोबारी सतीश सनपाल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जबलपुर के अलग-अलग थानों में दर्ज आपराधिक मामलों और एफआईआर को चुनौती देते हुए दाखिल की गई छह याचिकाओं पर मंगलवार को हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए सभी छह याचिकाएं खारिज कर दीं।
इन याचिकाओं में लॉर्डगंज थाने की अपराध संख्या 441/2022 से जुड़ा मामला भी शामिल था। सतीश सनपाल ने एफआईआर निरस्त करने, जांच पर रोक लगाने और दुबई से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में बयान दर्ज कराने की मांग की थी। अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।
याचिका में सनपाल की ओर से कहा गया था कि वह 14 मार्च 2020 से दुबई में रह रहा है और इसके बाद भारत नहीं आया। उसका दावा था कि उसकी गैरमौजूदगी में उसे बदनाम करने की नीयत से मामले दर्ज किए गए हैं।
सतीश सनपाल की ओर से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर को भी चुनौती दी गई थी। इनमें ओमती थाने में दर्ज तीन एफआईआर के अलावा सिविल लाइंस और मदन महल थाने में दर्ज एक-एक एफआईआर शामिल थीं।
लॉर्डगंज मामले में पुलिस ने सतीश को जांच में शामिल होने के लिए 25 जून और 6 जुलाई को नोटिस जारी किए थे। सतीश ने अपने वकील के माध्यम से नोटिस का जवाब देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में सहयोग करने की पेशकश की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि जांच किस तरीके से की जानी है, यह जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रत्येक मामले में आरोपी को वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से बयान दर्ज कराने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संचालित होने वाले अपराधों में आरोपी का घटनास्थल या देश में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होना उसे आपराधिक जिम्मेदारी से स्वतः मुक्त नहीं करता।
हाईकोर्ट ने माना कि संबंधित मामलों में जांच अभी जारी है और इस स्तर पर जांच को बीच में रोकना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि सह-आरोपियों के बयानों की प्रमाणिकता, गवाहों के मुकरने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में किया जाना है।
अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट धारा 528 के तहत मिनी ट्रायल करते हुए साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया इन मामलों को पूरी तरह झूठा या ऐसा नहीं कहा जा सकता, जिनमें एफआईआर को शुरुआत में ही निरस्त कर दिया जाए।
एफआईआर निरस्तीकरण की मांग पर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के भजन लाल मामले में निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सतीश सनपाल यह स्थापित नहीं कर सके कि उनके मामलों में एफआईआर निरस्त करने के लिए निर्धारित परिस्थितियां मौजूद हैं।
हाईकोर्ट ने सभी छह याचिकाएं खारिज करते हुए जबलपुर की संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालतों में लंबित कार्रवाई को कानून के अनुसार जारी रखने का निर्देश दिया है।
हालांकि, सतीश सनपाल को ट्रायल के दौरान अपने बचाव में सभी कानूनी और तथ्यात्मक आधार रखने की स्वतंत्रता दी गई है। वह जांच अधिकारी के समक्ष अपने पक्ष से संबंधित सामग्री भी प्रस्तुत कर सकता है।
इस तरह सतीश सनपाल की ओर से दायर छह याचिकाओं में से किसी में भी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अब संबंधित आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
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