
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग ने पाटन तहसील के ग्राम करौंदी में छापेमार कार्रवाई करते हुए नकली DAP (डीएपी) खाद तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली भारी मात्रा में सामग्री जब्त की है। कार्रवाई के दौरान ब्रांडेड कंपनी की खाली बोरियां, तौल कांटा और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई है। प्रथम दृष्टया आशंका है कि इनका उपयोग नकली खाद तैयार कर उसे नामी कंपनी के नाम से बाजार में बेचने के लिए किया जा रहा था।
कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे आकस्मिक निरीक्षण अभियान के तहत पाटन के ग्राम करौंदी में यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान आरोपी बहादुर सिंह राजपूत के परिसर से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री मिली, जिसे अधिकारियों ने तत्काल जब्त कर लिया।
विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जब्त सामग्री की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मौके से बड़ी संख्या में खाली और भरी बोरियां बरामद कीं। जब्त सामग्री में शामिल हैं—
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल नकली डीएपी खाद तैयार कर उसे ब्रांडेड कंपनी के नाम से पैक करने में किया जा रहा था।
कृषि विभाग को संदेह है कि पीपीएल कंपनी के नाम से मिलती-जुलती खाली बोरियां स्थानीय स्तर पर छपवाई गई थीं। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि नकली खाद की सप्लाई कहां की जा रही थी और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
यदि जांच में नकली खाद तैयार करने की पुष्टि होती है, तो यह मामला किसानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का हो सकता है। नकली उर्वरक के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसी वजह से कृषि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रहा है।
कृषि विभाग ने बताया कि पूरे मामले में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में नकली खाद के कारोबार पर रोक लगाने के लिए आगे भी निरीक्षण अभियान जारी रहेगा।
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