
Last updated: June 2nd, 2026 at 04:49 pm
जबलपुर में नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में अवैध रेत खनन के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। संयुक्त टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध रूप से जमा की गई रेत को नष्ट कर दिया। प्रशासन का कहना है कि नर्मदा तट पर अवैध खनन और रेत भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
इस कार्रवाई के बाद अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम अभिषेक सिंह ठाकुर के अनुसार कलेक्टर के विशेष निर्देशों के तहत नर्मदा नदी के किनारे होने वाली अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इसी दौरान प्रशासन को अवैध रेत भंडारण की गुप्त सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में सघन जांच अभियान शुरू किया।
कार्रवाई जबलपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पहोरी में की गई। जांच के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में अवैध रूप से जमा की गई रेत मिली।
प्रशासन ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए लगभग 3 से 4 डंपर रेत के बराबर अवैध भंडारण को नष्ट कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह रेत बिना अनुमति के संग्रहित की गई थी।
छापेमारी के दौरान प्रशासन को किसी भी प्रकार की नाव, डंपर या खनन में उपयोग होने वाली अन्य मशीनरी मौके पर नहीं मिली।
हालांकि अधिकारियों का मानना है कि अवैध खनन और भंडारण के पीछे संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसी वजह से मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
एसडीएम अभिषेक सिंह ठाकुर ने बताया कि जांच के दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल इन नामों और उनसे जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि जैसे ही आरोपों की पुष्टि होगी, संबंधित लोगों के खिलाफ खनिज नियमों और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन और भंडारण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में तटीय क्षेत्रों में निगरानी और छापेमारी अभियान को और तेज किया जाएगा।
अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध खनन या रेत भंडारण की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें।
विशेषज्ञों के अनुसार अवैध रेत खनन से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है, बल्कि नर्मदा नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
इसी वजह से प्रशासन लगातार ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर रहा है ताकि नदी और उसके पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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