होमट्रेंडिंगअधिवक्ता कविता नागार्जुन की संदिग्ध मौत पर फिर उठे सवाल, पिता ने लगाया दहेज हत्या का आरोप

अधिवक्ता कविता नागार्जुन की संदिग्ध मौत पर फिर उठे सवाल, पिता ने लगाया दहेज हत्या का आरोप

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जबलपुर में चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और संदिग्ध मौत का मामला
Twisha केस के बीच Kavita Nagarjun मौत मामला चर्चा में, आज सुनवाई

जबलपुर में चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और संदिग्ध मौत का मामला सुर्खियों में आ गया है। सेना के मेजर एवं चिकित्सक डॉ. ओम नागार्जुन की पत्नी और अधिवक्ता कविता नागार्जुन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर मृतका के पिता ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

मृतका के पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी बेटी की मौत को दहेज हत्या बताते हुए मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस मामले में दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर आज सुनवाई होनी है।

दहेज में दिए थे सोना, हीरे का हार और कार: पिता

पीड़ित पिता का आरोप है कि विवाह के समय उन्होंने लगभग 100 तोला सोना, 20 लाख रुपये का हीरे का हार और करीब 30 लाख रुपये की कार दहेज में दी थी।

इसके बावजूद दहेज की मांगें लगातार जारी रहीं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

हार्ट अटैक की थ्योरी पर उठाए सवाल

दक्षिणामूर्ति ने दावा किया कि कविता नागार्जुन को कभी भी हृदय संबंधी कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत को हार्ट अटैक बताने का प्रयास किया गया, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कुछ और कहानी बयां करती है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का दावा

पिता के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कविता नागार्जुन के सिर के आगे और पीछे गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में सबड्यूरल हेमेटोमा (Subdural Hematoma) और रक्तस्राव का उल्लेख है, जो किसी गंभीर हमले की ओर संकेत करता है।

उनका आरोप है कि यह प्राकृतिक मौत नहीं बल्कि हिंसक घटना का परिणाम हो सकता है।

अस्पताल पहुंचाने में देरी पर भी सवाल

पीड़ित पक्ष ने घटना के समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

दक्षिणामूर्ति का कहना है कि घटना स्थल से सैन्य अस्पताल की दूरी महज पांच मिनट थी, लेकिन चिकित्सक होने के बावजूद आरोपी पति को पत्नी को अस्पताल पहुंचाने में करीब ढाई घंटे का समय क्यों लगा।

उनके अनुसार यह देरी कई गंभीर संदेहों को जन्म देती है।

साक्ष्य दबाने के आरोप

मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने सैन्य और चिकित्सकीय पद का प्रभाव इस्तेमाल कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश की।

उन्होंने गोराबाजार पुलिस और सैन्य अस्पताल प्रबंधन पर भी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को दबाने तथा मामले को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

एम्बामिंग प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

दक्षिणामूर्ति ने दावा किया कि घटना के बाद बिना परिजनों की सहमति और पर्याप्त फॉरेंसिक जांच के शव का एम्बामिंग कराया गया।

उनका कहना है कि इससे कई महत्वपूर्ण चिकित्सीय और हिस्टोपैथोलॉजिकल साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।

अदालत में पहुंचा मामला

न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत एफआईआर दर्ज कराने संबंधी आवेदन निरस्त किए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है।

परिवार का कहना है कि वह पिछले एक वर्ष से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है।

आज की सुनवाई पर टिकी नजरें

कविता नागार्जुन मौत मामले में आज होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

यह मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। सुनवाई के बाद मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

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