
जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 पर्यटकों की मौत के बाद अब एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। हादसे से करीब दो महीने पहले ही क्रूज की खराब स्थिति और उसके इंजनों में गंभीर तकनीकी खराबी को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद कथित रूप से पुराने और जर्जर हो चुके क्रूज का संचालन जारी रखा गया। सामने आए पत्र ने मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरगी स्थित मैकल रिसोर्ट के मैनेजर द्वारा मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के क्षेत्रीय प्रबंधक को लिखे गए पत्र में क्रूज की खराब तकनीकी स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार यह पत्र हादसे से करीब दो महीने पहले भेजा गया था।
पत्र में बताया गया था कि 14 जनवरी 2025 को राउंड के दौरान क्रूज के दोनों इंजन सीज हो गए थे। इतना ही नहीं, तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच क्रूज का इंजन अचानक बंद हो गया था, जिसके बाद उसे बाहर निकालने के लिए स्पीड बोट की मदद लेनी पड़ी।
पत्र में यह भी लिखा गया कि क्रूज में लगे दूसरे इंजन को स्टार्ट करने में लगातार समस्या आ रही थी। उसकी “सेल्फ की गरारी” चढ़ जाने के कारण कई बार संचालन बाधित हो रहा था। इसके चलते क्रूज सेवाएं बार-बार बंद करनी पड़ती थीं और पर्यटक नाराजगी जाहिर कर रहे थे।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि तकनीकी विशेषज्ञों ने पहले ही इंजन बदलने की सिफारिश कर दी थी। मैकल रिसोर्ट के मैनेजर ने अपने पत्र में हैदराबाद की “मैसेज हैदराबाद बोट बिल्डर” कंपनी के ईमेल का हवाला भी दिया था। विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा था कि क्रूज के इंजन पुराने और आउटडेटेड हो चुके हैं तथा उनके स्पेयर पार्ट्स बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञों की राय थी कि सुरक्षा के लिहाज से इंजनों को तत्काल बदलना जरूरी है। इसके बावजूद लगभग 20 साल पुराने इस क्रूज का संचालन जारी रखा गया। जानकारी के अनुसार यह क्रूज वर्ष 2006 में बरगी डैम में संचालन के लिए लाया गया था।
अब यह सवाल उठ रहा है कि जब तकनीकी खामियों और संभावित खतरे की जानकारी पहले से मौजूद थी तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि तकनीकी खराबियों के कारण क्रूज की सेवाएं बार-बार बाधित हो रही थीं। इससे पर्यटक लगातार असंतोष जाहिर कर रहे थे। मैनेजर ने साफ लिखा था कि वर्तमान स्थिति में क्रूज का संचालन किसी भी समय पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
इन तमाम चेतावनियों के बावजूद क्रूज को जल पर्यटन के लिए उपयोग में रखा गया, जो अब जांच का बड़ा विषय बन गया है।
बरगी क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार पहले ही हाई लेवल जांच आयोग गठित कर चुकी है। रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में बनी समिति पूरे मामले की जांच कर रही है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने प्रदेशभर में क्रूज और बोट क्लब संचालन पर रोक लगाने की जानकारी भी दी थी।
अब सामने आए पत्र के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यह पता लगाया जाएगा कि:
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आधिकारिक रूप से किसी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते चेतावनियों को गंभीरता से लिया गया होता तो 13 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
जल पर्यटन और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी बन सकता है।
बरगी डैम क्रूज हादसे से जुड़े नए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हादसे से महीनों पहले तकनीकी खराबियों और संभावित खतरे की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद यदि क्रूज का संचालन जारी रखा गया, तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला माना जा सकता है।
अब सबकी नजर जस्टिस संजय द्विवेदी जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यह जांच तय करेगी कि आखिर किन परिस्थितियों और किन स्तरों पर हुई चूक ने 13 पर्यटकों की जान ले ली। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि भविष्य में प्रदेश में जल पर्यटन को सुरक्षित बनाने के लिए कौन से सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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