होमट्रेंडिंगजबलपुर में 25 अस्पतालों पर प्रशासन सख्त: प्रदूषण नियमों की अनदेखी पर CMHO का नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब

जबलपुर में 25 अस्पतालों पर प्रशासन सख्त: प्रदूषण नियमों की अनदेखी पर CMHO का नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब

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जबलपुर जिले में बिना वैध अनुमति संचालित हो रहे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू
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जबलपुर जिले में बिना वैध अनुमति संचालित हो रहे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी करने वाले 25 चिकित्सकीय संस्थानों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं देने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद निजी अस्पतालों और हेल्थ सेक्टर में हलचल तेज हो गई है।

“कंसेंट टू ऑपरेट” के बिना संचालन पर कार्रवाई

जानकारी के अनुसार जिन अस्पतालों और क्लीनिकों ने “कंसेंट टू ऑपरेट” (Consent to Operate) लिए बिना संचालन किया है, उन्हें नोटिस जारी किया गया है।

CMHO कार्यालय ने संबंधित संस्थानों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के पालन में की जा रही है।

क्या है “कंसेंट टू ऑपरेट”?

प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत किसी भी चिकित्सकीय संस्थान को संचालन से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत अस्पतालों और क्लीनिकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि मेडिकल वेस्ट और अन्य प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन किया जा रहा है।

जवाब नहीं देने पर होगी कड़ी कार्रवाई

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पतालों के संचालन पर रोक जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

CMHO कार्यालय ने जारी की सूची

नोटिस जारी किए गए संस्थानों में कई बड़े निजी अस्पताल और क्लीनिक शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • विराट नेत्रालय
  • ब्लू स्काई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
  • नोबेल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
  • सनराइज हॉस्पिटल
  • नारायण हेल्थ केयर
  • साई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
  • स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल
  • छवि आई हॉस्पिटल
  • श्री राम हॉस्पिटल
  • डॉ. मकसूदा अंसारी मेमोरियल हॉस्पिटल
  • परम्भा नेत्रालय
  • शिव सागर हॉस्पिटल
  • महावीर मल्टीस्पेशलिटी एंड कैंसर हॉस्पिटल
  • गजकेसरी हॉस्पिटल
  • अमृतसिटी हॉस्पिटल
  • सिहोरा हॉस्पिटल
  • लाइफ केयर हॉस्पिटल
  • प्राइम हेल्थ केयर
  • गोलछा ऑर्थो केयर हॉस्पिटल
  • शिव नेत्रालय
  • विजयश्री मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल
  • आइडियल फर्टिलिटी एंड आईवीएफ जेनेटिक सेंटर
  • देवश्री मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
  • संकल्प मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
  • विजया मेमोरियल हॉस्पिटल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी देना होगा जवाब

प्रशासन ने कहा है कि सभी संबंधित संस्थानों को अपना जवाब CMHO कार्यालय के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी प्रस्तुत करना होगा।

अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ी हलचल

इस कार्रवाई के बाद निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हलचल बढ़ गई है। कई अस्पताल अब अपने दस्तावेज और अनुमति प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अस्पतालों में नियमों के पालन को लेकर जवाबदेही बढ़ेगी।

प्रशासन का सख्त संदेश

CMHO कार्यालय ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी बिना वैध अनुमति या नियमों के उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

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