
जबलपुर में बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामोल सिरप का सैंपल फेल होने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। इस मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवनीत कोठारी ने सफाई देते हुए कहा है कि यह समस्या केवल एक विशेष बैच तक सीमित है और संबंधित बैच अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रकरण की जांच में जुटा हुआ है।
जानकारी के अनुसार बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामोल सिरप में “क्रिस्टल फॉर्मेशन” की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद संबंधित दवा के सैंपल की जांच की गई, जिसमें सैंपल फेल होने की बात सामने आई।
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग और दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को लेकर CMHO डॉ. नवनीत कोठारी ने कहा कि जिस सिरप को लेकर शिकायत मिली थी, वह केवल एक बैच से जुड़ा मामला है।
उन्होंने बताया कि संबंधित बैच अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और फिलहाल उसी बैच की दवा उपयोग में नहीं है। विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
डॉ. कोठारी के अनुसार सैंपल फेल होने के पीछे केवल दवा निर्माण ही नहीं बल्कि स्टोरेज यानी भंडारण से जुड़े कारण भी हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार तापमान और भंडारण व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण भी दवाओं में इस तरह की समस्या आ सकती है। फिलहाल सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि यदि जांच में भंडारण या सप्लाई व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी सामने आती है, तो आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
CMHO ने बताया कि संबंधित दवा कंपनी को भी पूरे मामले की जानकारी पत्र लिखकर दे दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग कंपनी से भी जवाब और तकनीकी जानकारी जुटा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समस्या किन कारणों से सामने आई।
बच्चों की दवा से जुड़ा मामला होने के कारण कई अभिभावकों में चिंता देखी जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल डॉक्टरों की सलाह पर दवाओं का उपयोग करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दवा में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
विभाग ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे और दवा वितरण प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि मामले में पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाएगी।
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