
Last updated: May 7th, 2026 at 06:54 am
जबलपुर के बरगी क्षेत्र में 30 अप्रैल 2026 को हुई दर्दनाक नाव दुर्घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई लोगों की मौत और कई परिवारों के उजड़ने के बाद अब न्यायपालिका ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और पुलिस पर सख्त रुख अपनाया है।
जिला न्यायालय के एडीजे/न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने बरगी थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि नाव चालक के खिलाफ तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए और दो दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल की शाम लगभग 5:30 से 6:30 बजे के बीच नाव चालक ने कथित रूप से लापरवाहीपूर्वक नाव का संचालन किया, जिसके कारण नाव डूब गई।
आरोप यह भी है कि नाव चालक स्वयं परिस्थितियों से परिचित होने के बावजूद डूब रहे लोगों को छोड़कर सुरक्षित निकल गया और बचाव कार्य में कोई सहयोग नहीं किया।
कोर्ट ने इस कृत्य को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106 तथा धारा 110 के अंतर्गत गंभीर अपराध की श्रेणी में माना है।
न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
कोर्ट ने उन स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों की प्रशंसा भी की जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर डूबते लोगों को बचाने का प्रयास किया। ऐसे प्रयास मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते FIR दर्ज नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में नाव संचालन जैसी गतिविधियों में और बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
इस आदेश के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से इस मामले में की गई कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
बरगी क्षेत्र पर्यटन और जल गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में इस हादसे ने सुरक्षा मानकों, नाव संचालन नियमों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नावों की क्षमता, सुरक्षा उपकरणों और चालक की जवाबदेही को लेकर सख्त नियम लागू नहीं किए गए, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।
बरगी नाव हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी की बड़ी परीक्षा बन चुका है। कोर्ट का सख्त रुख यह संकेत देता है कि लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।
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