
Last updated: June 10th, 2026 at 01:23 pm
जबलपुर जिले के कटंगी क्षेत्र में रविवार शाम आए तेज तूफान, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कुछ ही देर चले खराब मौसम ने खेतों, खलिहानों और ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई। कटाई के बाद खेतों में रखी गेहूं समेत अन्य फसलें भीग गईं, जबकि कई स्थानों पर पेड़ और मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
किसानों का कहना है कि मौसम की इस मार ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अब प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर कटंगी क्षेत्र के कई गांवों में रविवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली।
तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी। कई इलाकों में पेड़ गिर गए, जबकि खेतों और खलिहानों में रखी उपज बिखर गई।
स्थानीय किसानों के अनुसार गेहूं सहित कई फसलों की कटाई पूरी हो चुकी थी और उपज खेतों व खलिहानों में रखी हुई थी।
अचानक आई बारिश और तेज हवा के कारण फसलें भीग गईं और कई जगह बिखर गईं। किसानों का कहना है कि इससे उपज की गुणवत्ता प्रभावित होगी और बाजार में उचित कीमत मिलने में परेशानी आ सकती है।
ओलावृष्टि और तेज हवा का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि कई मकानों की छतें, टीन शेड और अन्य ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने से जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आगामी फसल के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधनों की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाएगा।
मौसम विभाग ने पहले ही जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में तेज आंधी और तूफान की संभावना जताई थी।
विभाग की ओर से कुछ क्षेत्रों में 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई थी। हालांकि अनुमानित गति का तूफान नहीं आया, लेकिन अपेक्षाकृत कम रफ्तार की आंधी और ओलावृष्टि ने भी व्यापक नुकसान पहुंचाया।
कटंगी क्षेत्र के किसान अब प्रशासन और राज्य सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शीघ्र सर्वे कर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए ताकि वे आगामी खेती के लिए आवश्यक तैयारियां समय पर कर सकें।
रबी सीजन की फसल कटाई के बाद किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नुकसान का आकलन कब होगा और प्रभावित किसानों को राहत कब तक मिलेगी।
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