
Last updated: June 19th, 2026 at 02:04 pm
जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुवि) के 36वें दीक्षा समारोह की तैयारियों के बीच उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब मेडल वितरण को लेकर नया नियम सामने आया। राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन से पहले आयोजित रिहर्सल के दौरान विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन पर भेदभाव के आरोप लगाए।
विश्वविद्यालय में 21 जून को होने वाले दीक्षा समारोह में राष्ट्रपति के शामिल होने की तैयारी चल रही है। इसी सिलसिले में गुरुवार को रिहर्सल आयोजित की गई थी। शुरुआत में रिहर्सल सामान्य रूप से चली, लेकिन जैसे ही विद्यार्थियों को मेडल वितरण से जुड़े नए नियम की जानकारी मिली, माहौल तनावपूर्ण हो गया।
छात्रों को पता चला कि समारोह में राष्ट्रपति के हाथों केवल चुनिंदा 20 विद्यार्थियों को ही मेडल प्रदान किए जाएंगे। यह सुनते ही बड़ी संख्या में विद्यार्थी नाराज हो गए और उन्होंने मौके पर ही विरोध जताना शुरू कर दिया।
प्रोफेसर राकेश बाजपेयी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि केवल उन विद्यार्थियों को ही राष्ट्रपति के हाथ से मेडल दिलवाया जाएगा, जिन्होंने दो या उससे अधिक मेडल हासिल किए हैं। तैयार की गई 20 विद्यार्थियों की सूची में सभी ऐसे छात्र शामिल हैं, जिन्हें एक से अधिक मेडल प्राप्त हुए हैं।
इस फैसले से वे छात्र निराश हो गए, जिन्होंने एक ही मेडल हासिल किया है, लेकिन वे भी इस खास मौके का हिस्सा बनना चाहते थे।
जैसे ही यह जानकारी छात्रों तक पहुंची, उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण निर्णय बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि मेहनत से प्राप्त किया गया हर मेडल समान महत्व रखता है और सभी मेडल विजेताओं को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने का अवसर मिलना चाहिए।
विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि यह नियम उनकी मेहनत का अपमान है और इससे कई योग्य विद्यार्थियों को मंच से दूर रखा जा रहा है।
नाराज विद्यार्थी एकजुट होकर कुलगुरु कार्यालय पहुंचे और वहां प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय में बदलाव नहीं किया गया, तो वे कार्यक्रम का बहिष्कार भी कर सकते हैं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और सभी मेडल विजेताओं को समान अवसर देना चाहिए।
छात्रों ने यह भी मुद्दा उठाया कि उनसे दीक्षा समारोह के लिए 700 रुपये का पंजीयन शुल्क लिया गया है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब सभी ने समान शुल्क दिया है, तो फिर सम्मान प्राप्त करने के अवसर में भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
उनका कहना है कि यदि वे समारोह का हिस्सा हैं, तो उन्हें भी राष्ट्रपति के हाथों मेडल लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
इस पूरे मामले ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियां हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों का बढ़ता विरोध है।
यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह समारोह के आयोजन पर भी असर डाल सकता है।
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