
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर काम बंद हड़ताल शुरू कर दी है। वेतन विसंगतियों के निराकरण, एरियर भुगतान और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर 200 से अधिक नर्सिंग कर्मचारी डीन कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। नर्सों के आंदोलन से मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी के साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान कई बार मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल का फैसला लिया।
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों का निराकरण, लंबित एरियर का भुगतान और अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
बुधवार को बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित डीन कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
हड़ताल की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने नर्सिंग कर्मचारियों से बातचीत शुरू कर दी है और आंदोलन समाप्त करने की अपील की है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी अंतिम सहमति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज महाकौशल क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारियों के काम बंद करने से ओपीडी, वार्ड और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। अस्पताल प्रशासन आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है।
नर्सिंग कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पांच सूत्रीय मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन और कर्मचारियों के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हैं।
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