
जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर काम बंद हड़ताल शुरू कर दी है। संभाग के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज में नर्सों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। बुधवार को 200 से अधिक नर्सिंग कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज के डीन कार्यालय के सामने धरना देकर अपनी पांच सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। प्रशासन से संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलने के बाद उन्होंने काम बंद कर धरना शुरू कर दिया।
नर्सिंग कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों का निराकरण, लंबित एरियर का भुगतान और अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान शामिल है। उनका कहना है कि लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
बुधवार को 200 से अधिक नर्सें मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित डीन कार्यालय के सामने एकत्रित हुईं और धरने पर बैठ गईं। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की और प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
हड़ताल की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज के डीन और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने नर्सिंग कर्मचारियों से चर्चा कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी सहमति की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
मेडिकल कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि प्रशासन आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है।
नर्सिंग कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पांच सूत्रीय मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन और नर्सिंग कर्मचारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है।
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