
Last updated: May 19th, 2026 at 03:43 pm
जबलपुर शहर के रिहायशी इलाकों में बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे ज्वलनशील पदार्थों के गोदामों, दुकानों और कारखानों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। लगातार सामने आ रही आगजनी की घटनाओं और बढ़ते खतरे को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से जवाब मांगा है।
हाई कोर्ट ने पूछा है कि आखिर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिना फायर सेफ्टी व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के ऐसे प्रतिष्ठान कैसे संचालित हो रहे हैं। मामले को लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किए गए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एस. भट्टी और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की खंडपीठ में हुई।
यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से डॉ. पी.जी. नाजपांडेय और रजत भार्गव द्वारा दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि जबलपुर शहर के कई रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील पदार्थों से जुड़े गोदाम, दुकानें और छोटे कारखाने खुलेआम संचालित हो रहे हैं।
आरोप है कि इनमें से कई प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और कई जगहों पर फायर विभाग की अनुमति तक मौजूद नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपपाध्य ने कोर्ट को बताया कि बिना अनुमति बड़े पैमाने पर ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे बड़े हादसों का खतरा बना हुआ है।
जबलपुर में हाल के दिनों में कबाड़ बाजारों और ज्वलनशील सामग्री वाले इलाकों में आग की कई घटनाएं सामने आई हैं।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि आगजनी की घटनाओं में पहले भी जान-माल का नुकसान हो चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
नियमों के विपरीत चल रहे प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों की निगरानी नहीं होने के आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों और अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने पूछा है कि बिना सुरक्षा इंतजामों के ऐसे गोदाम और कारखानों को संचालन की अनुमति कैसे दी गई और अब तक इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
इस मामले के सामने आने के बाद जबलपुर में फायर सेफ्टी और शहरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में नियमित निरीक्षण और सख्त नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित विभागों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शहर में अवैध और असुरक्षित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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