होमट्रेंडिंगबरगी हादसे के पीड़ितों की अंतिम विदाई भी बनी संघर्ष: शव भेजने में आईं कई बाधाएं, भावुक कर गई पूरी घटना

बरगी हादसे के पीड़ितों की अंतिम विदाई भी बनी संघर्ष: शव भेजने में आईं कई बाधाएं, भावुक कर गई पूरी घटना

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जबलपुर से सामने आई यह घटना सिर्फ प्रशासनिक अव्यवस्था की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों के दर्द को भी
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जबलपुर से सामने आई यह घटना सिर्फ प्रशासनिक अव्यवस्था की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों के दर्द को भी सामने लाती है, जो अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे।

बरगी बांध हादसे में जान गंवाने वाले कामराज और उनके बेटे श्रीतमिल के पार्थिव शरीर को तमिलनाडु भेजने की प्रक्रिया कई परेशानियों और भावुक पलों से गुजरी। हर बार उम्मीद जगी, लेकिन नई बाधा सामने आ गई।

खराब मौसम के कारण वापस लाने पड़े शव

जानकारी के अनुसार रविवार को दोनों शवों को डुमना एयरपोर्ट ले जाया गया था, ताकि उन्हें तमिलनाडु भेजा जा सके।

लेकिन इसी दौरान सूचना मिली कि तिरुचिरापल्ली में खराब मौसम के कारण विमान वहां लैंड नहीं कर पाएगा। इसके बाद शवों को वापस अस्पताल की मर्चुरी में रखना पड़ा।

परिवार के लिए बढ़ता गया इंतजार

पहले से ही गहरे दुख में डूबे परिवार के लिए यह इंतजार बेहद कठिन साबित हो रहा था।

हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की बेचैनी और भावनात्मक पीड़ा बढ़ती जा रही थी। उन्हें उम्मीद थी कि अब कम से कम अंतिम विदाई की प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हो जाएगी।

सोमवार सुबह फिर जगी उम्मीद

सोमवार सुबह एक बार फिर प्रशासन की तैयारी के साथ शवों को एयरपोर्ट पहुंचाया गया।

परिजन भी इस उम्मीद में थे कि अब पार्थिव शरीर उनके गृह राज्य के लिए रवाना हो जाएंगे। लेकिन इसी दौरान एक और मुश्किल सामने आ गई।

पायलट ने शव ले जाने से किया इनकार

बताया गया कि कार्गो विमान के पायलट ने शव ले जाने से मना कर दिया।

पायलट का कहना था कि शवों में डीकंपोजिशन शुरू हो चुका है, इसलिए उन्हें इस स्थिति में ले जाना संभव नहीं होगा।

परिजनों के लिए बेहद भावुक पल

यह सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पर मौजूद परिजन टूट गए।

एक तरफ अपनों को खोने का दर्द था, दूसरी ओर अंतिम विदाई में लगातार आ रही बाधाएं परिवारों को अंदर तक झकझोर रही थीं। मौके पर मौजूद अधिकारी भी स्थिति को लेकर असमंजस में दिखाई दिए।

प्रशासन ने संभाली स्थिति

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया।

कलेक्टर और अन्य अधिकारियों ने पायलट से लगातार बातचीत की और पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ समझाने का प्रयास किया।

करीब दो घंटे बाद बनी सहमति

लगातार बातचीत और समझाइश के बाद आखिरकार पायलट शव ले जाने के लिए तैयार हो गया।

सुबह करीब 9 बजे विमान ने टेकऑफ किया और दोनों पार्थिव शरीरों को तमिलनाडु के लिए रवाना किया गया।

घटना ने खड़े किए कई सवाल

यह पूरी घटना कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ जाती है।

क्या ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और पहले से तैयारी नहीं होनी चाहिए थी? क्या शोक में डूबे परिवारों को इस तरह की मानसिक परेशानी से बचाया जा सकता था?

अंतिम विदाई में संवेदनशीलता जरूरी

अंतिम विदाई हर परिवार के लिए बेहद भावुक क्षण होता है। ऐसे समय में प्रशासनिक प्रक्रिया का संवेदनशील और व्यवस्थित होना बेहद जरूरी माना जाता है।

बरगी हादसे के बाद सामने आई यह घटना सिर्फ एक व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन गई है।

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