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E-20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: जबलपुर के उपभोक्ता मंच ने पेट्रोलियम मंत्रालय को लिखा पत्र, कीमत घटाने और शुद्ध पेट्रोल का विकल्प देने की मांग

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E-20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर चिंता जताते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को
E-20 Petrol पर उपभोक्ताओं की शिकायत, Petroleum Ministry को भेजा गया पत्र

E-20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर चिंता जताते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र भेजा है। संगठन ने दावा किया है कि E-20 पेट्रोल के उपयोग से कई वाहन चालकों को माइलेज में कमी और इंजन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पत्र के माध्यम से सरकार से उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

E-20 पेट्रोल को लेकर उठाए गए सवाल

संगठन का कहना है कि देशभर से उपभोक्ताओं की ओर से E-20 पेट्रोल को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण कई वाहनों की माइलेज कम हो रही है और विशेष रूप से पुरानी गाड़ियों के इंजन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

संगठन ने यह भी कहा कि सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E-20) के कारण वाहनों की माइलेज में लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

उपभोक्ता मंच की प्रमुख मांगें

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने पेट्रोलियम मंत्रालय से दो प्रमुख मांगें की हैं—

  • E-20 पेट्रोल की कीमत कम की जाए, क्योंकि एथेनॉल की लागत पेट्रोल की तुलना में कम होती है। ऐसे में मिश्रित ईंधन की कीमत भी उसी अनुपात में कम होनी चाहिए।
  • पुरानी गाड़ियों के लिए बिना एथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिन वाहनों के इंजन E-20 के अनुकूल नहीं हैं, उनके मालिकों को विकल्प मिल सके।

उपभोक्ताओं के हित में कार्रवाई की मांग

मंच के अध्यक्ष पी. जी. नाजपांडे ने पत्र में कहा कि देशभर में उपभोक्ता E-20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इस विषय पर जल्द उचित निर्णय लिया जाए।

यह पत्र जिला प्रशासन, जबलपुर के माध्यम से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा गया है।

सरकार का उद्देश्य और उपभोक्ताओं की चिंता

केंद्र सरकार E-20 पेट्रोल को प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू कर रही है। वहीं, उपभोक्ता संगठन माइलेज में कमी और पुरानी गाड़ियों पर संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।

फिलहाल, इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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