
Last updated: June 18th, 2026 at 12:35 pm
जबलपुर से आई एक बड़ी कानूनी खबर में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को झटका लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर पहले लगाई गई रोक को हटा दिया है। अदालत का यह फैसला तब सामने आया जब कई अवसर दिए जाने के बावजूद उनकी ओर से कोई प्रभावी पैरवी नहीं की गई।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट से जुड़ा हुआ है। पहले हाई कोर्ट ने इस वारंट पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिससे अभिषेक बनर्जी को राहत मिली थी।
लेकिन सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि अदालत द्वारा दिए गए कई अवसरों और स्पष्ट चेतावनी के बावजूद भी अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई वकील बहस के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसे अदालत ने गंभीरता से लिया।
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने इस लापरवाही को आधार बनाते हुए अंतरिम राहत समाप्त कर दी। साथ ही रजिस्ट्री को आदेश की प्रति तत्काल ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए गए।
पूरा मामला भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। आरोप है कि नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने उन्हें “गुंडा” कहा था।
आकाश विजयवर्गीय, जो भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र हैं, ने इस बयान को अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए वर्ष 2021 में भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का केस दर्ज कराया था।
इसी मामले में अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
शुरुआत में हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत से अभिषेक बनर्जी को कुछ समय के लिए राहत मिली थी। लेकिन अब जब यह रोक हटा दी गई है, तो उनकी कानूनी स्थिति फिर से जटिल हो गई है।
अदालत का यह रुख यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाता है और अदालत समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाती है।
गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटने के बाद अब मामला फिर से ट्रायल कोर्ट में सक्रिय हो गया है। संभावना है कि अब इस केस में आगे की कार्रवाई तेज होगी।
यदि अभिषेक बनर्जी की ओर से जल्द कोई कानूनी कदम नहीं उठाया जाता, तो उन्हें अदालत में पेश होने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है। अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी अहम भूमिका है।
वहीं दूसरी ओर मामला भाजपा नेता से जुड़ा हुआ है, जिससे इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। ऐसे में इस केस के हर घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
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