
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वर्ष 2019 से लंबित ओबीसी आरक्षण से जुड़े 91 मामलों की सुनवाई अब विशेष बेंच करेगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया के अनुमोदन से प्रशासनिक आदेश जारी कर इन मामलों को न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच-2 को सौंपा गया है।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, प्रकरण 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किए जाएंगे और 15 जुलाई से नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
प्रशासनिक आदेश में बताया गया है कि न्यायमूर्ति विनय सराफ पहले भी इन मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। ऐसे में न्यायिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें पुनः विशेष बेंच में शामिल किया गया है। उनके साथ न्यायमूर्ति आनंद पाठक इन मामलों की सुनवाई करेंगे।
ओबीसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को विशेष पीठ गठित कर इन मामलों का तीन महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा ने याचिकाकर्ताओं की सुनवाई पूरी कर राज्य सरकार का पक्ष सुनने के लिए 16 जून की तारीख तय की थी।
नियमित सुनवाई उस समय प्रभावित हुई, जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा का सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नयन हो गया और न्यायमूर्ति विनय सराफ का इंदौर स्थानांतरण हो गया।
इसके बाद 16 जून और 24 जून को न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति भगवती प्रसाद शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में नियमित सुनवाई के निर्देश दिए थे।
ओबीसी आरक्षण से जुड़े ये मामले लंबे समय से लंबित हैं और इनका असर भर्ती एवं आरक्षण से संबंधित कई प्रक्रियाओं पर भी पड़ा है। ऐसे में विशेष बेंच के गठन के बाद अब सभी पक्षों की नजर 15 जुलाई से शुरू होने वाली नियमित सुनवाई पर रहेगी।
हाई कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई से इस बहुप्रतीक्षित मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।
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