
Last updated: June 27th, 2026 at 12:14 pm
Rani Durgavati Vishwavidyalaya, के कुलगुरु की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। इससे पहले भी जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत 5 हजार रुपये की लागत (कॉस्ट) लगा चुकी है।
मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। हालांकि, कई महीने बीत जाने के बाद भी अदालत में जवाब पेश नहीं किया गया।
इस पर कोर्ट ने पहले लागत भी लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया।
यह याचिका जबलपुर एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर की गई है। याचिका में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव आवश्यक होता है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में इस पात्रता शर्त की अनदेखी की गई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब अभी अदालत में प्रस्तुत नहीं हुआ है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को स्पष्ट रूप से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है।
अब मामले की अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि संबंधित पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हैं या नहीं। इसके बाद ही मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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