
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट से हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआई जांच में उपयुक्त (Suitable) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों की लंबित परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से लंबित परीक्षाएं कराने और रुके हुए परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी गई थी।
वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त या कमियों वाले कॉलेजों की परीक्षा आयोजित किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई।
हाईकोर्ट ने:
यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी पढ़ाई और भविष्य लंबे समय से प्रभावित हो रहा था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं संस्थानों को मिलेगी जो सीबीआई जांच में उपयुक्त पाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, जांच के दायरे में आए 695 नर्सिंग कॉलेजों में से:
इन्हीं कॉलेजों के लिए परीक्षा और परिणाम संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिन संस्थानों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है या जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनसे संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।
अदालत के इस रुख को नर्सिंग शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और याचिकाकर्ता विशाल बघेल स्वयं उपस्थित रहे। वहीं, राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।
नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की जांच के कारण पिछले कई वर्षों से हजारों छात्रों की परीक्षाएं और परिणाम लंबित थे। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद योग्य संस्थानों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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