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नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, योग्य कॉलेजों की परीक्षाओं को मिली मंजूरी

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट से हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन
नर्सिंग फर्जीवाड़ा केस में छात्रों को राहत, हाईकोर्ट ने दी परीक्षा की अनुमति

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट से हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआई जांच में उपयुक्त (Suitable) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों की लंबित परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से लंबित परीक्षाएं कराने और रुके हुए परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी गई थी।

वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त या कमियों वाले कॉलेजों की परीक्षा आयोजित किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई।

इन छात्रों को मिली राहत

हाईकोर्ट ने:

  • शैक्षणिक सत्र 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति दी।
  • शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लगभग 9 हजार छात्रों के लिए GNM तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की स्वीकृति प्रदान की।

यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी पढ़ाई और भविष्य लंबे समय से प्रभावित हो रहा था।

सिर्फ योग्य कॉलेजों को मिली अनुमति

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं संस्थानों को मिलेगी जो सीबीआई जांच में उपयुक्त पाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, जांच के दायरे में आए 695 नर्सिंग कॉलेजों में से:

  • 156 कॉलेज सीधे तौर पर ‘सूटेबल’ पाए गए।
  • 89 कॉलेजों ने अपनी कमियां दूर कर उपयुक्तता का दर्जा हासिल किया।

इन्हीं कॉलेजों के लिए परीक्षा और परिणाम संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है।

बाकी कॉलेजों पर फिलहाल रोक बरकरार

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिन संस्थानों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है या जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनसे संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।

अदालत के इस रुख को नर्सिंग शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोनों पक्षों की ओर से हुई पैरवी

मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और याचिकाकर्ता विशाल बघेल स्वयं उपस्थित रहे। वहीं, राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।

छात्रों के भविष्य पर पड़ा था असर

नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की जांच के कारण पिछले कई वर्षों से हजारों छात्रों की परीक्षाएं और परिणाम लंबित थे। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद योग्य संस्थानों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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