
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और टाइगर रिजर्व प्रबंधन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए और प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से कान्हा टाइगर रिजर्व से लगे क्षेत्रों में करीब 2 हजार कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। अब इन कुत्तों को बूस्टर डोज देने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। अदालत ने कहा कि जहां भी पद खाली हैं, उन्हें जल्द से जल्द भरा जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में वन्यजीवों का समय पर उपचार हो सके।
इसके अलावा अदालत ने टाइगर रिजर्व के आसपास बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए डॉग बर्थ कंट्रोल (Dog Birth Control) कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने के भी निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि 17 अगस्त तक प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के आसपास कुत्तों के टीकाकरण की अद्यतन स्थिति संबंधी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।
अदालत यह जानना चाहती है कि संक्रमण रोकने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या कार्ययोजना है।
यह जनहित याचिका कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से बाघों की संदिग्ध मौतों को लेकर दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों का समुचित पालन नहीं होने से बाघों की सुरक्षा प्रभावित हुई है। याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संक्रमण अन्य टाइगर रिजर्व तक भी फैल सकता है।
इसी कारण प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले कुत्तों का व्यापक टीकाकरण आवश्यक बताया गया है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद कई आवश्यक पद अब भी रिक्त हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता का मुद्दा भी लंबित है। इस संबंध में हाईकोर्ट पहले ही केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांग चुका है।
याचिका के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही, उसके चार अर्धवयस्क शावकों और युवा नर बाघ महावीर सहित कुल आठ बाघों की मौत हुई थी। इन मौतों के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और संक्रमण नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने अदालत में पक्ष रखा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब राज्य सरकार और वन विभाग पर प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने, विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की नियुक्ति करने और संक्रमण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आगामी सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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