
Last updated: May 26th, 2026 at 01:07 pm
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के निर्देश पर न्यायमूर्ति विनय सराफ का स्थानांतरण जबलपुर से इंदौर और न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा का ट्रांसफर इंदौर से जबलपुर किया गया है। प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार यह आदेश आगामी 15 जून 2026 से प्रभावी होगा। इसके बाद दोनों न्यायाधीश अपने-अपने नए मुख्यालयों पर कार्यभार संभालेंगे और मामलों की सुनवाई करेंगे।
हाई कोर्ट प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक कार्यों के बेहतर संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
जस्टिस विनय सराफ वर्तमान में जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहे थे, जबकि जस्टिस प्रणय वर्मा इंदौर खंडपीठ में पदस्थ थे।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों न्यायाधीश 15 जून से अपने नए स्थानों पर कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस बदलाव के बाद इंदौर और जबलपुर दोनों ही खंडपीठों में नए रोस्टर और मामलों के वितरण में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने के लिए समय-समय पर किए जाते हैं।
जस्टिस विनय सराफ हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई का हिस्सा रहे हैं। OBC आरक्षण से जुड़े चर्चित मामले की सुनवाई भी चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई थी।
इसके अलावा मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में न्यायिक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक फैसलों और जनहित याचिकाओं से जुड़े कई अहम आदेशों में भी उनकी भूमिका रही है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की प्रधान पीठ जबलपुर में स्थित है, जबकि इंदौर और ग्वालियर में इसकी स्थायी खंडपीठें संचालित होती हैं। ऐसे में न्यायाधीशों के स्थानांतरण को न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
जबलपुर में जस्टिस प्रणय वर्मा के आने के बाद कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई और नए बेंच गठन को लेकर भी कानूनी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। वहीं इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विनय सराफ की पदस्थापना को भी महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के स्थानांतरण को न्यायिक व्यवस्था की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इससे विभिन्न खंडपीठों में मामलों के बोझ को संतुलित करने और सुनवाई प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिलती है।
अब 15 जून के बाद दोनों न्यायाधीश नई जिम्मेदारियों के साथ अपने-अपने मुख्यालयों पर कार्य करेंगे, जिस पर प्रदेश के कानूनी जगत की नजर बनी हुई है।
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