होमट्रेंडिंग122 साल पुराने मॉडल स्कूल में अनोखा गुरु वंदन समारोह, पूर्व छात्रों ने गुरुओं का किया सम्मान

122 साल पुराने मॉडल स्कूल में अनोखा गुरु वंदन समारोह, पूर्व छात्रों ने गुरुओं का किया सम्मान

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जबलपुर के 122 वर्ष पुराने मॉडल स्कूल में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां आयोजित गुरु वंदन
Jabalpur Model School: 122 साल पुराने स्कूल में गुरु वंदन समारोह

जबलपुर के 122 वर्ष पुराने मॉडल स्कूल में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां आयोजित गुरु वंदन समारोह में स्कूल के भूतपूर्व छात्रों ने अपने पूर्व शिक्षकों का सम्मान कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। लंबे समय बाद गुरुजनों और पूर्व छात्रों का मिलन हुआ तो स्कूल से जुड़ी पुरानी यादें भी ताजा हो गईं।

75 साल पहले स्कूल से पास आउट हुए पूर्व छात्रों का सम्मान

इस वर्ष आयोजित गुरु वंदन समारोह की खास बात रही कि करीब 75 वर्ष पूर्व इसी स्कूल से शिक्षा पूरी करने वाले पूर्व छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वहीं 50 वर्ष और 25 वर्ष पूर्व मॉडल स्कूल से पास आउट हुए छात्रों ने भी अपने गुरुजनों का सम्मान किया।

समारोह में पूर्व छात्रों और शिक्षकों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और स्कूल के पुराने दिनों की यादें साझा कीं। वर्षों बाद साथ आए गुरु और शिष्यों के बीच आत्मीयता का माहौल देखने को मिला।

पूर्व शिक्षक भी बड़ी संख्या में हुए शामिल

गुरु वंदन समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व शिक्षक भी मौजूद रहे। पूर्व छात्रों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। इस दौरान कई पुराने शिक्षक और छात्र वर्षों बाद एक-दूसरे से मिले, जिससे कार्यक्रम भावुक हो गया।

कार्यक्रम में स्कूल के पूर्व छात्रों ने अपने जीवन में शिक्षकों के योगदान को याद किया और गुरु-शिष्य संबंध की अहमियत पर प्रकाश डाला।

सांसद आशीष दुबे ने भी किया गुरुजनों का सम्मान

समारोह में जबलपुर के सांसद आशीष दुबे भी शामिल हुए। वे स्वयं मॉडल स्कूल के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने अपने गुरुजनों का सम्मान कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

सांसद के अपने पुराने शिक्षकों से मिलने के दौरान समारोह में आत्मीय माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल और अपने छात्र जीवन से जुड़ी यादों को भी साझा किया।

पुराने गुरु-शिष्यों का मिलन बना यादगार

122 वर्ष पुराने मॉडल स्कूल में आयोजित यह समारोह केवल सम्मान कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। वर्षों बाद गुरु और शिष्यों के आमने-सामने आने से स्कूल से जुड़ी पुरानी यादें फिर जीवंत हो उठीं।

गुरुजनों का सम्मान, पूर्व छात्रों की भावनाएं और गुरु-शिष्य के आत्मीय मिलन ने पूरे कार्यक्रम को भावुक और यादगार बना दिया। समारोह ने एक बार फिर गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भारतीय परंपरा को सामने रखा।

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