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मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 66 लाख रुपये के गबन का खुलासा, जांच कमेटी गठित

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जबलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल की ओपीडी स्लिप से प्राप्त
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जबलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल की ओपीडी स्लिप से प्राप्त होने वाली राशि में करीब 66 लाख रुपये के गबन का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी गठित कर दी गई है, वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन ने गढ़ा थाना पुलिस को शिकायत भी सौंप दी है।

ओपीडी स्लिप की राशि खातों में नहीं हुई जमा

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में ओपीडी स्लिप के माध्यम से मिलने वाली राशि वर्ष 2020 से 2025 के बीच नियमित रूप से कॉलेज के अधिकृत खातों में जमा नहीं की गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मनी रसीद बुक के जरिए प्राप्त हुई रकम और बैंक खातों में जमा राशि के बीच बड़ा अंतर पाया गया। इसी वित्तीय विसंगति ने पूरे मामले का खुलासा किया।

बैंक खातों और रिकॉर्ड के मिलान में सामने आया अंतर

अधिकारियों द्वारा जब बैंक खाते और अस्पताल के रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तब यह स्पष्ट हुआ कि सॉफ्टवेयर में दर्ज राशि और वास्तविक जमा राशि के बीच लगभग 66 लाख रुपये का अंतर है।

सूत्रों के अनुसार, यह राशि ओपीडी पर्चियों और मनी रसीदों से प्राप्त हुई थी, लेकिन उसे निर्धारित खातों में जमा नहीं कराया गया।

जांच कमेटी का गठन

मामले के उजागर होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल जांच कमेटी का गठन कर दिया है। समिति को पूरे वित्तीय रिकॉर्ड, मनी रसीद बुक, बैंक एंट्री और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं।

डीन ने पुलिस को दी शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन ने गढ़ा थाना पुलिस को लिखित शिकायत सौंप दी है। पुलिस अब शिकायत के आधार पर जांच शुरू करने की तैयारी में है।

संभावना जताई जा रही है कि जांच के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

इतनी बड़ी राशि का वर्षों तक खातों में जमा न होना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में नियमित ऑडिट और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की अनियमितताओं को समय रहते रोका जा सके।

यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि बैंक खातों और रिकॉर्ड का मिलान पहले किया जाता, तो इतनी बड़ी राशि के अंतर का खुलासा काफी पहले हो सकता था।

निष्कर्ष

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आया 66 लाख रुपये के गबन का मामला प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सभी की नजर जांच कमेटी और पुलिस कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में जांच से यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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