होमजबलपुर दक्षिणग्वारीघाटसड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट और स्कूल की मांग; तीन दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट और स्कूल की मांग; तीन दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

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मढ़िया टोला क्षेत्र में आदिवासी समाज के लोगों ने शासकीय भूमि पर किए जा रहे वृक्षारोपण और मूलभूत सुविधाओं की
मढ़िया टोला में आदिवासी समाज का प्रदर्शन, वृक्षारोपण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर विरोध

मढ़िया टोला क्षेत्र में आदिवासी समाज के लोगों ने शासकीय भूमि पर किए जा रहे वृक्षारोपण और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पूर्व सूचना के उस भूमि पर वृक्षारोपण शुरू कर दिया, जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामीण मवेशियों के चरने, आवागमन और कब्रिस्तान के रूप में करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

पूर्वजों के समय से उपयोग में रही भूमि पर शुरू हुआ वृक्षारोपण

आदिवासी समाज के मुखिया राजू सिंह मरावी ने बताया कि संबंधित शासकीय भूमि का उपयोग उनके पूर्वजों के समय से ग्रामीणों द्वारा किया जाता रहा है। उनका कहना है कि इसी भूमि से लोगों का आवागमन होता है, मवेशी चरते हैं और समुदाय का कब्रिस्तान भी वहीं स्थित है। ऐसे में बिना स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए वृक्षारोपण शुरू कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।

मूलभूत सुविधाओं के अभाव का आरोप

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पूर्व विधायक ईश्वरदास रोहाणी द्वारा सड़क, खेल मैदान, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक इन पर अमल नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लगी लगभग 50 स्ट्रीट लाइटों में से 40 बंद पड़ी हैं। इसके अलावा नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही और नालियों की सफाई भी समय पर नहीं की जाती, जिससे लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

तीन दिन का मिला आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनते हुए तीन दिन के भीतर समाधान की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय लोगों की जरूरतों और पारंपरिक उपयोग वाली भूमि को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाएं।

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