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जबलपुर कलेक्टर कार्यालय की कुर्की करने पहुंचे कोर्ट के अधिकारी, 15 दिन में भुगतान का भरोसा

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जबलपुर। शहर में बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब जिला न्यायालय के आदेश पर कोर्ट के नाजिर और
जबलपुर कलेक्ट्रेट की कुर्की करने पहुंचे कोर्ट के अधिकारी

जबलपुर। शहर में बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब जिला न्यायालय के आदेश पर कोर्ट के नाजिर और अधिवक्ता कलेक्टर कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने पहुंचे। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को लंबे समय से मुआवजा नहीं मिलने के मामले में अदालत ने कलेक्टर कार्यालय की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया था। आदेश के पालन के लिए कोर्ट की टीम कलेक्ट्रेट पहुंची और कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की।

मुआवजा नहीं मिलने पर कोर्ट ने दिया था कुर्की का आदेश

यह मामला वर्ष 2019 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2019 को कुंडम में एसडीएम कार्यालय की बोलेरो की टक्कर से नवाब खान की मौत हो गई थी। इसके बाद मृतक की पत्नी नूरजहां और परिवार के अन्य सदस्यों ने मुआवजे के लिए अदालत में दावा पेश किया था।

मामले की सुनवाई के बाद 25 फरवरी 2025 को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने पीड़ित परिवार को 12 लाख 93 हजार रुपये मुआवजा देने और इस राशि पर 7 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया था। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज और अन्य खर्च जुड़ने से बकाया राशि बढ़कर करीब 18 लाख रुपये हो गई।

कोर्ट के नाजिर और अधिवक्ता पहुंचे कलेक्ट्रेट

मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर पीड़ित पक्ष ने जिला न्यायालय में निष्पादन की कार्रवाई के लिए आवेदन दिया। इसके बाद अदालत ने कलेक्टर कार्यालय की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया।

आदेश के पालन के लिए अधिवक्ता सीपी सिंह, प्रमोद विश्वकर्मा और आत्माराम लखेरा कोर्ट के नाजिर के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इस दौरान सरकारी वाहन की चाबी लेने और कार्यालय की संपत्ति की सूची तैयार करने जैसी कार्रवाई की तैयारी भी की गई।

15 दिन में भुगतान का लिखित आश्वासन, फिलहाल टली कुर्की

कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच भुगतान की समयसीमा को लेकर बातचीत हुई। प्रशासन की ओर से पहले 15 कार्य दिवस में भुगतान का आश्वासन देने की बात सामने आई, जिस पर अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि 15 दिन और 15 कार्य दिवस में अंतर होता है।

इसके बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन में 15 दिन के भीतर भुगतान करने की बात कही। लिखित भरोसा मिलने के बाद फिलहाल कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई।

अब प्रशासन के सामने भुगतान करने की चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासन के सामने 15 दिन के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की चुनौती है। लंबे समय से लंबित मुआवजे के लिए पीड़ित परिवार को अदालत की शरण लेनी पड़ी और मामला कलेक्टर कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने तक पहुंच गया।

अब देखना होगा कि प्रशासन तय समयसीमा में भुगतान करता है या फिर इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की स्थिति बनती है।

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