
जबलपुर। शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक अस्पतालों में शामिल सेठ गोविंद दास जिला चिकित्सालय (पूर्व विक्टोरिया अस्पताल) की हेरिटेज इमारत अब जर्जर होती नजर आ रही है। करीब 150 वर्ष पुराने इस भवन के दो वार्डों में लगातार पानी के रिसाव और दीवारों-छत में आई दरारों के चलते सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन ने एहतियातन दोनों वार्ड खाली करा दिए हैं।
अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित वार्डों में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब भवन की तकनीकी जांच कराकर मरम्मत और संरक्षण को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जबलपुर का विक्टोरिया अस्पताल, जिसे वर्तमान में सेठ गोविंद दास जिला चिकित्सालय के नाम से जाना जाता है, वर्ष 1876 में स्थापित किया गया था। उस समय यह शहर का प्रमुख सिटी डिस्पेंसरी और अस्पताल था।
ब्रिटिशकालीन स्थापत्य शैली में निर्मित यह इमारत अपनी भव्य वास्तुकला के लिए जानी जाती रही है। वर्षों तक यह मध्य भारत के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल रहा और आज भी शहर की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण भवन में पानी का रिसाव बढ़ गया है। वहीं आसपास चल रहे निर्माण कार्यों का प्रभाव भी इमारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इसी वजह से दो वार्डों की दीवारों और छत में दरारें दिखाई देने लगीं। मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए इन वार्डों का उपयोग तत्काल बंद करने का निर्णय लिया गया।
जिला प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने दोनों प्रभावित वार्डों को खाली करा दिया।
इन वार्डों में भर्ती सभी मरीजों को अस्पताल के अन्य सुरक्षित वार्डों में स्थानांतरित कर दिया गया, ताकि उपचार प्रभावित न हो और किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका से बचा जा सके।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों के इलाज की व्यवस्था पहले की तरह सुचारु रूप से जारी है।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, भवन का विस्तृत तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन हिस्सों की मरम्मत की जरूरत है और किन स्थानों पर विशेष संरक्षण कार्य किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक इमारत की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत कोठारी के अनुसार, भवन की स्थिति को देखते हुए एहतियातन दोनों वार्ड खाली कराए गए हैं। मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि समय रहते यह कदम उठाने से किसी भी संभावित दुर्घटना की आशंका को टाला जा सका है।
सेठ गोविंद दास जिला चिकित्सालय केवल स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र ही नहीं, बल्कि जबलपुर की ऐतिहासिक पहचान भी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भवन की मरम्मत और संरक्षण का कार्य हेरिटेज मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके और आने वाले वर्षों तक यह धरोहर शहर की पहचान बनी रहे।
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