
जबलपुर में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के नए बिजली कनेक्शनों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि विभाग के तीन आउटसोर्स कर्मचारियों ने सिस्टम में एंट्री किए बिना स्मार्ट मीटर लगाकर उपभोक्ताओं से नए कनेक्शन के नाम पर करीब 98 हजार रुपये की हेराफेरी कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब विभाग ने उपभोक्ताओं से जानकारी जुटाई और रिकॉर्ड का मिलान किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिन उपभोक्ताओं के यहां नए बिजली कनेक्शन लगाए गए थे, उनका रिकॉर्ड विभागीय ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज ही नहीं था। इसके बाद पूरे मामले की जांच कर रांझी थाना में तीन आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जानकारी के अनुसार, मामला रांझी क्षेत्र के बजरंग नगर, मानेगांव और जेडीए कॉलोनी का है। यहां करीब 10 उपभोक्ताओं ने नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था।
उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग के कर्मचारियों को सभी जरूरी दस्तावेज और निर्धारित शुल्क भी जमा कराया था। इसके बाद उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन चालू कर दिया गया।
लेकिन बाद में विभागीय जांच में पता चला कि इन कनेक्शनों की ऑनलाइन एंट्री ही नहीं की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी के स्मार्ट मीटर लगाकर नए कनेक्शन चालू कर दिए। इतना ही नहीं, उपभोक्ताओं से वसूली गई करीब 98 हजार रुपये की राशि भी विद्युत वितरण कंपनी के आधिकारिक खाते में जमा नहीं कराई गई।
इस पूरे मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब विभाग ने नए कनेक्शनों का सत्यापन शुरू किया, तब संबंधित उपभोक्ताओं से पूछताछ की गई। उपभोक्ताओं ने भुगतान की जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए। इसके बाद रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो पता चला कि कई कनेक्शन विभागीय पोर्टल पर दर्ज ही नहीं हैं।
यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
मामले में विभाग ने तीन आउटसोर्स कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, उनके नाम हैं—
आरोप है कि इन कर्मचारियों ने नए बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर उपभोक्ताओं से राशि ली, लेकिन उसे कंपनी के खाते में जमा नहीं कराया और विभागीय प्रक्रिया का पालन किए बिना कनेक्शन जारी कर दिए।
शिकायत मिलने के बाद रांझी थाना पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस दस्तावेजों, विभागीय रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं है और क्या इसी तरह के अन्य कनेक्शन भी जारी किए गए हैं।
पुलिस जांच के साथ-साथ विद्युत वितरण कंपनी ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद बिजली उपभोक्ताओं से भी अपील की जा रही है कि नए कनेक्शन लेने के बाद अपने कनेक्शन की ऑनलाइन स्थिति और भुगतान की रसीद का सत्यापन अवश्य करें।
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