
Last updated: June 25th, 2026 at 01:08 pm
जबलपुर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और अवैध पार्किंग की समस्या को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के निर्देश पर कलेक्ट्रेट क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक 30 दिनों के लिए वन-वे ट्रैफिक ट्रायल लागू किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य न्यायालय परिसर के आसपास यातायात को सुगम बनाना और सड़क पर वाहनों के दबाव को कम करना है।
नई व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वन-वे ट्रायल लागू रहेगा। इस दौरान निर्धारित मार्ग पर वाहनों की आवाजाही एक दिशा में ही होगी, जिससे जाम की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को इस व्यवस्था के प्रभाव का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़क किनारे पूरे दिन वाहन खड़े करने की प्रवृत्ति ट्रैफिक जाम की बड़ी वजह है। ऐसे में सड़क पर अनधिकृत रूप से वाहन पार्क करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि न्यायालय क्षेत्र में यातायात बाधित न हो और सड़कें पार्किंग स्थल में न बदलें।
अदालत ने अधिकारियों और अधिवक्ताओं को पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था अपनाने की सलाह दी है। साथ ही कार-पूलिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि पार्किंग की समस्या कम हो और सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाया जा सके।
हाईकोर्ट और जिला न्यायालय परिसर के बाहर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त यातायात पुलिस बल तैनात किया जाएगा। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि वन-वे व्यवस्था का पालन हो और यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं बल्कि अंतरिम समाधान के रूप में लागू की जा रही है। क्षेत्र में प्रस्तावित मल्टी-लेवल पार्किंग के निर्माण तक इसी तरह के वैकल्पिक उपायों के जरिए ट्रैफिक प्रबंधन किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई में न्यायालय क्षेत्र में फ्लाईओवर निर्माण सहित अन्य स्थायी यातायात समाधान पर भी विचार किया जाएगा। अदालत ने संबंधित विभागों से इस संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।
नई व्यवस्था से न्यायालय आने वाले पक्षकारों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में इसे स्थायी रूप से लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है।
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