
मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील का असर अब प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में भी दिखाई देने लगा है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल मंगलवार को अपनी लग्जरी कार छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे। उनका यह कदम पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास से करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर हाईकोर्ट पहुंचने वाले जस्टिस बंसल ने लोगों को ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया।
जानकारी के अनुसार जस्टिस डी.डी. बंसल मंगलवार सुबह अपने निवास से साइकिल लेकर निकले और सीधे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे। रास्तेभर लोगों की नजरें उन पर टिकी रहीं। आमतौर पर हाईप्रोफाइल पदों पर बैठे अधिकारी और न्यायिक अधिकारी सरकारी या निजी वाहनों का उपयोग करते हैं, ऐसे में एक हाईकोर्ट जज का साइकिल से अदालत पहुंचना लोगों के लिए हैरानी और प्रेरणा दोनों का विषय बन गया।
हाईकोर्ट परिसर में भी कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के बीच इस पहल को लेकर चर्चा होती रही। कई लोगों ने इसे “सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी” का उदाहरण बताया। जस्टिस बंसल ने अपने व्यवहार से यह संदेश देने की कोशिश की कि छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन खपत को देखते हुए ऐसे कदम समाज में सकारात्मक जागरूकता पैदा कर सकते हैं।
दरअसल हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो, इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिल के अधिक उपयोग पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि ऊर्जा बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।
वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार ईंधन संरक्षण पर जोर दे रही है। इसी क्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की खबरें सामने आई हैं।
जस्टिस बंसल का यह कदम भी उसी अपील से प्रेरित बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग साइकिल का उपयोग करें तो इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
जस्टिस डी.डी. बंसल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह धारणा गलत है कि हाईकोर्ट के जज साइकिल से नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा संजीव सचदेवा से मिली। इसके बाद उन्होंने स्वयं साइकिल का उपयोग शुरू करने का निर्णय लिया। खास बात यह है कि उनके इस कदम का असर हाईकोर्ट कर्मचारियों पर भी दिखाई देने लगा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ कर्मचारियों ने भी साइकिल से कार्यालय आना-जाना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग इस तरह की पहल करते हैं तो इसका सामाजिक प्रभाव तेजी से दिखाई देता है। इससे आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ती है और व्यवहारिक बदलाव की संभावना मजबूत होती है।
मामले को लेकर अभी किसी प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में जस्टिस बंसल की पहल की सराहना हो रही है।
मीडिया से बातचीत में जस्टिस बंसल ने कहा:
उन्होंने यह भी कहा कि लोग केवल सरकार की योजनाओं पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं भी जिम्मेदारी निभाएं।
देश के कई राज्यों में प्रधानमंत्री की अपील के बाद अधिकारी सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करते दिखाई दिए हैं। दिल्ली, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी ऐसी पहलें सामने आई हैं।
जबलपुर शहर में जस्टिस बंसल की यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने इसे सकारात्मक संदेश बताया। कई नागरिकों का कहना है कि जब उच्च पदों पर बैठे लोग सादगी अपनाते हैं तो समाज में अच्छा संदेश जाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार:
हाल के वर्षों में देश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर मुद्दा बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आम लोग सप्ताह में कुछ दिन भी साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें तो प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि शहरों में सुरक्षित साइकिल ट्रैक और बेहतर यातायात व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग साइकिल उपयोग के लिए प्रेरित हो सकें।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल का साइकिल से अदालत पहुंचना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब देश ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा कर रहा है, न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्य द्वारा उठाया गया यह कदम लोगों को प्रेरित करने वाला माना जा रहा है।
ईंधन बचत, प्रदूषण नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह की पहलें महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। आने वाले समय में यदि प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर ऐसे प्रयास बढ़ते हैं तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत हो सकता है
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