
Last updated: May 22nd, 2026 at 04:08 pm
जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती मांग के बीच तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों की निगरानी और सख्त कर दी है। इंडियन ऑयल और बीपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने नए नियम लागू करते हुए थोक ईंधन बिक्री पर नियंत्रण बढ़ा दिया है।
अब पेट्रोल पंप संचालकों को 5000 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल और 10000 रुपये से अधिक का डीजल बेचने पर ग्राहक की पूरी जानकारी कंपनियों को देनी होगी।
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अनुसार तेल कंपनियां अब सभी रिटेल आउटलेट्स की ऑनलाइन ट्रैकिंग कर रही हैं।
कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि रिटेल पेट्रोल पंपों से औद्योगिक उपयोग के लिए ईंधन देने पर पूरी तरह रोक रहेगी, क्योंकि इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए ईंधन की दरें अलग होती हैं।
इसी कारण बड़े लेनदेन पर अब विशेष निगरानी रखी जा रही है।
नई व्यवस्था को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि कंपनियां एक तरफ किसी तरह की कमी नहीं होने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा ईंधन बिक्री पर नोटिस भेजे जा रहे हैं।
संचालकों का आरोप है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनियां पंप के नोजल तक बंद करने की चेतावनी दे रही हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में कई बड़े ट्रक और टैंकर ऐसे हैं जिनमें एक बार में 10000 रुपये से ज्यादा का डीजल भरना सामान्य बात है।
ऐसे में ग्राहकों को मना करने पर विवाद की स्थिति बन रही है।
अधिकारियों ने पंप संचालकों से कहा है कि वे उपभोक्ताओं को नए नियमों की जानकारी दें।
ईंधन आपूर्ति व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों ने पहले से चली आ रही क्रेडिट व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी है।
अब पंप संचालकों को पहले नकद भुगतान करना होगा, उसके बाद ही टैंकर भेजे जाएंगे।
इसके लिए शाम 5 बजे तक भुगतान की समय सीमा तय की गई है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो अगले दिन ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
नई व्यवस्था का असर जबलपुर और आसपास के ग्रामीण जिलों में भी दिखाई देने लगा है।
कई जगह समय पर पेट्रोल-डीजल नहीं पहुंचने के कारण कुछ पेट्रोल पंप अस्थायी रूप से खाली हो रहे हैं। हालांकि कंपनियां इसे शॉर्टेज मानने से इनकार कर रही हैं।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
कंपनियों के अनुसार डिजिटल ट्रैकिंग का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि रिटेल ईंधन का इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में न हो।
साथ ही उपभोक्ताओं से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।
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