
मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनके हमलों से बच्चों समेत आम लोगों की सुरक्षा को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है।
इस जनहित याचिका का शीर्षक ‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’ रखा गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अब तक उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को देश के सभी हाईकोर्ट को आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर स्वतः संज्ञान लेने के निर्देश दिए थे।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस समस्या का ठोस और प्रभावी समाधान होने तक हाईकोर्ट स्तर पर मामले की लगातार निगरानी की जाए। इसी निर्देश के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की है।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से आवारा कुत्तों के हमलों की रोकथाम के लिए अब तक किए गए प्रयासों का पूरा ब्योरा मांगा। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह कोर्ट में उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने सरकार से आवारा कुत्तों के हमलों और उनकी रोकथाम को लेकर की गई कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की निगरानी में अब इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी।
आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर प्रदेश के कई शहरों में लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट की निगरानी में शुरू हुई यह सुनवाई इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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