
जबलपुर में पेंशनरों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से लंबित पेंशन मामलों को लेकर पेंशनरों ने जल सत्याग्रह कर सरकारों का ध्यान खींचने की कोशिश की। पानी में खड़े होकर किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब चर्चा का विषय बन गया है।
पेंशनरों का कहना है कि वे वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
जबलपुर में हुए इस जल सत्याग्रह ने स्थानीय स्तर पर बड़ा असर डाला है। बड़ी संख्या में पेंशनर एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
उनका कहना है:
इस अनोखे विरोध के कारण अब आम लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
जानिए इस पूरे विवाद की असली वजह क्या है।
वर्ष 2000 में जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का विभाजन हुआ, तब पेंशन से जुड़े वित्तीय दायित्वों को 74:26 के अनुपात में बांटा गया था।
इसी आधार पर पेंशन और महंगाई राहत (DA) लागू करने का नियम तय हुआ था।
लेकिन पेंशनरों का आरोप है कि इस व्यवस्था के बावजूद कई मामलों में फैसले समय पर नहीं लिए जाते।
पेंशनरों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या दोनों राज्यों के बीच समन्वय की कमी है।
मुख्य परेशानियां:
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत कई मामलों में छत्तीसगढ़ सरकार को मध्य प्रदेश की सहमति लेना जरूरी होता है। यही प्रक्रिया देरी का बड़ा कारण बन रही है।
जल सत्याग्रह कर रहे पेंशनरों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं।
इनमें शामिल हैं:
पेंशनरों का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
इस आंदोलन के बाद अब सभी की नजर दोनों राज्य सरकारों के रुख पर टिकी है।
पेंशनरों को उम्मीद है कि:
अगर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज होने के संकेत भी दिए जा रहे हैं।
इस मुद्दे का असर सिर्फ पेंशनरों तक सीमित नहीं है।
यही वजह है कि अब यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय बनता जा रहा है।
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