
Last updated: June 8th, 2026 at 12:10 pm
जबलपुर में आज विश्व पोहा दिवस के अवसर पर एक खास आयोजन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। शहर के महापौर निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम सिर्फ एक भोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारंपरिक खानपान को बढ़ावा देने का एक मजबूत संदेश भी देता नजर आया।
इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, इंजीनियरों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। सभी ने एक साथ बैठकर पोहे का स्वाद लिया और इसके सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने कहा कि पोहा केवल एक साधारण व्यंजन नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी खानपान की पहचान है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में विदेशी फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने पारंपरिक और पौष्टिक नाश्तों को बढ़ावा दें। पोहा न केवल स्वादिष्ट है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
महापौर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि पोहा अब सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। प्रदेश के कई शहरों में यह सुबह के नाश्ते का अहम हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। खासकर नई पीढ़ी के लिए यह जरूरी है कि वह भारतीय खानपान की परंपराओं को समझे और अपनाए।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय खानपान की परंपराओं से जोड़ना और स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
महापौर ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे ताकि स्वदेशी व्यंजनों को और अधिक पहचान मिल सके। इससे न सिर्फ संस्कृति मजबूत होगी बल्कि स्थानीय खानपान को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। सभी ने एक साथ बैठकर पोहे का आनंद लिया और इसे भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बताया।
गणमान्य नागरिकों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और पारंपरिक खानपान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।
विश्व पोहा दिवस जैसे आयोजन सिर्फ खानपान तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का माध्यम बनते हैं।
आज के दौर में जब फास्ट फूड का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में पोहा जैसे पारंपरिक और पौष्टिक विकल्पों को बढ़ावा देना समय की जरूरत बन गया है।
शहर में इस आयोजन के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रम देखने को मिल सकते हैं। इससे स्थानीय व्यंजनों को पहचान मिलने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।
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