होमट्रेंडिंगजबलपुर में EOW की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए दो इंजीनियर

जबलपुर में EOW की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए दो इंजीनियर

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मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बिजली मुख्यालय शक्ति भवन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़ी और अहम कार्रवाई
Shakti Bhawan में EOW की रेड, 2 बिजली अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बिजली मुख्यालय शक्ति भवन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़ी और अहम कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के मामले का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों—अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले और कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा—को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई न सिर्फ विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां अब सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

10 लाख के बिल भुगतान के बदले मांगी गई थी रिश्वत

मामले की जांच में सामने आया है कि यह पूरा घटनाक्रम एक निर्माण कार्य के भुगतान से जुड़ा हुआ है। कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील में स्थित जूनियर इंजीनियर कार्यालय भवन के निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा करीब 10 लाख रुपए का बिल प्रस्तुत किया गया था।

आरोप है कि इस बिल को पास कराने और भुगतान जारी करने के बदले संबंधित अधिकारियों ने ठेकेदार से रिश्वत की मांग की। यह मांग सीधे तौर पर सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने और निजी लाभ लेने के उद्देश्य से की गई थी।

ठेकेदार की शिकायत बनी कार्रवाई की वजह

इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी ने, जिन्होंने हिम्मत दिखाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से शिकायत की।

शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि:

  • कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा ने 20,000 रुपए की रिश्वत मांगी
  • अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले ने 30,000 रुपए की मांग की

शिकायत मिलने के बाद EOW ने पहले पूरे मामले की गोपनीय जांच की और आरोपों की पुष्टि होने पर एक सुनियोजित ट्रैप प्लान तैयार किया।

योजनाबद्ध ट्रैप में फंसे अधिकारी

EOW की टीम ने पूरी रणनीति के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया। तय योजना के अनुसार ठेकेदार को रिश्वत की रकम लेकर अधिकारियों के पास भेजा गया।

जैसे ही लेन-देन की प्रक्रिया शुरू हुई, पहले से तैनात EOW टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को मौके पर ही पकड़ लिया।

  • प्रहलाद मर्सकोले को 10,000 रुपए लेते हुए पकड़ा गया
  • चंद्रशेखर मेहरा को 15,000 रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया गया

इस दौरान सभी आवश्यक साक्ष्य भी एकत्र किए गए, जिससे मामला मजबूत हो सके।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

EOW ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा सार्वजनिक सेवक द्वारा रिश्वत मांगने या स्वीकार करने से संबंधित है।

अब आगे की जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि:

  • क्या दोनों अधिकारी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं
  • क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी संलिप्त हैं
  • क्या विभाग में भ्रष्टाचार का कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है

विभाग में मचा हड़कंप, सिस्टम पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद शक्ति भवन समेत पूरे बिजली विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सरकारी दफ्तर के अंदर इस तरह खुलेआम रिश्वतखोरी का मामला सामने आना यह दर्शाता है कि सिस्टम में अभी भी पारदर्शिता की कमी है और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।

EOW की सख्ती से बढ़ी उम्मीद

EOW की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अगर कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही, यह कदम उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं।

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