होमट्रेंडिंगपाटन थाना क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवन तोड़ते समय मजदूरों पर गिरी छत, एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल

पाटन थाना क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवन तोड़ते समय मजदूरों पर गिरी छत, एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल

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पाटन थाना क्षेत्र के कंतौरा गांव में मंगलवार को जर्जर स्कूल भवन को तोड़ने के दौरान बड़ा हादसा हो गया।
Patan में स्कूल भवन की छत गिरी, मलबे में दबकर मजदूर की मौत

पाटन थाना क्षेत्र के कंतौरा गांव में मंगलवार को जर्जर स्कूल भवन को तोड़ने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। भवन की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में दो मजदूर आ गए। हादसे में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और डायल-112 को सूचना दी। घायल मजदूर को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

छत के मलबे में दबने से मजदूर की मौत

जानकारी के अनुसार, कंतौरा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला के पुराने और जर्जर भवन को तोड़ने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक भवन की छत भरभराकर गिर गई।

मलबे में दबने से नुनसर निवासी मनोज प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथ काम कर रहे पवन नामक मजदूर को गंभीर चोटें आईं, जिसे डायल-112 की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दो साल पहले जर्जर घोषित किया गया था भवन

बताया जा रहा है कि स्कूल भवन को करीब दो वर्ष पहले जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद स्कूल का संचालन दूसरे भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था।

पुराने भवन को हटाने का कार्य चल रहा था, तभी यह हादसा हो गया। घटना के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

डायल-112 ने पहुंचकर संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया।

घायल मजदूर को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जबकि मृतक के शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच

पाटन थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि भवन तोड़ने के दौरान सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद भवन ध्वस्तीकरण कार्यों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यों के दौरान मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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