
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर पर कथित हमले के बाद डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल का असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान एक जूनियर डॉक्टर के साथ कथित मारपीट की घटना हुई। घटना के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि लगातार मांगों के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर एकत्रित हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में लगातार मरीजों और परिजनों की भीड़ रहती है, ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और अन्य नियमित सेवाएं प्रभावित हुईं। सुबह से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को डॉक्टरों के नहीं मिलने से काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को बिना उपचार वापस लौटना पड़ा, जबकि गंभीर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया गया।
मेडिकल कॉलेज प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। हड़ताल के चलते दूर-दराज से आए मरीजों और उनके परिजनों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने समय पर इलाज नहीं मिलने की शिकायत भी की।
अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉक्टरों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास शुरू किया है। प्रशासन का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डॉक्टरों की मांगों पर भी विचार किया जा रहा है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने के बाद ही आंदोलन वापस लेने पर निर्णय लिया जाएगा।
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