होमजबलपुर पश्चिमजबलपुर मेडिकल कॉलेज में इतिहास रचा, संयुक्त जुड़वा शिशुओं की जटिल सर्जरी का पहला चरण सफल

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इतिहास रचा, संयुक्त जुड़वा शिशुओं की जटिल सर्जरी का पहला चरण सफल

-
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए संयुक्त जुड़वा (कंजॉइंट
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इतिहास: संयुक्त जुड़वा शिशुओं की जटिल सर्जरी का पहला चरण सफल

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए संयुक्त जुड़वा (कंजॉइंट ट्विन्स) शिशुओं की जटिल सर्जरी का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। करीब छह घंटे तक चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को 24 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अंजाम दिया। सर्जरी के बाद दोनों नवजातों को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है।

नरसिंहपुर से रेफर होकर पहुंचे थे दोनों शिशु

मेडिकल कॉलेज के अनुसार, जीवान और युवान नाम के दोनों नवजात नरसिंहपुर से रेफर होकर जबलपुर पहुंचे थे। चिकित्सकों ने बताया कि दोनों इशियोपैगस कंजॉइंट ट्विन्स (Ischiopagus Conjoined Twins) हैं, जिनका शरीर श्रोणि (पेल्विस) के हिस्से से आपस में जुड़ा हुआ है। इस तरह के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं और अनुमानित रूप से लगभग दो लाख जन्मों में एक बार सामने आते हैं।

आंत और मूत्र प्रणाली बनी सबसे बड़ी चुनौती

डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती दोनों बच्चों की आपस में जुड़ी हुई आंत और मूत्र प्रणाली थी। इसके अलावा दोनों शिशुओं में जन्मजात हृदय संबंधी विकार की आशंका को देखते हुए ऑपरेशन से पहले विस्तृत मेडिकल प्लान तैयार किया गया। प्रत्येक चरण की विशेषज्ञों द्वारा सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई, ताकि किसी भी प्रकार का जोखिम कम किया जा सके।

24 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने संभाली जिम्मेदारी

प्रोफेसर डॉ. विकेश अग्रवाल ने बताया कि ऑपरेशन के लिए दो सर्जिकल टीम और दो एनेस्थीसिया टीम गठित की गई थीं। पूरी सर्जरी के दौरान दो एनेस्थीसिया मशीन, दो वेंटिलेटर और अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया। ऑपरेशन थिएटर में हर पल दोनों नवजातों की स्थिति पर अलग-अलग विशेषज्ञ नजर बनाए हुए थे।

दोनों नवजातों की हालत फिलहाल स्थिर

सर्जरी के बाद दोनों बच्चों को मेडिकल कॉलेज की एनआईसीयू में भर्ती किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, जीवान की स्थिति फिलहाल स्थिर है, हालांकि उसे संक्रमण है और जन्मजात हृदय संबंधी विकार की संभावना को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है। वहीं युवान की हालत भी स्थिर बनी हुई है और उसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है।

आगे भी होंगे उपचार के कई चरण

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसे संस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों शिशुओं के पूर्ण उपचार के लिए आगे भी चरणबद्ध सर्जरी और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होगी। चिकित्सकों का कहना है कि आने वाले दिनों में दोनों बच्चों की स्थिति के अनुसार उपचार की अगली रणनीति तय की जाएगी।

आपको यह भी पसंद आ सकता है

No Comments