
साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड इंजीनियर को अपना शिकार बनाते हुए डेढ़ लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने अस्पताल का संपर्क नंबर जानने के लिए गूगल पर सर्च किया था, लेकिन वहां मिले कथित फर्जी नंबर पर कॉल करना उन्हें भारी पड़ गया। ठगों ने रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनका मोबाइल हैक कर दो बैंक खातों से करीब 1.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।
मामला गोरखपुर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, गोरखपुर थाना क्षेत्र निवासी रिटायर्ड इंजीनियर प्रदीप वर्मा को किसी अस्पताल से संपर्क करना था। इसके लिए उन्होंने गूगल पर अस्पताल का नंबर खोजा। सर्च रिजल्ट में मिले नंबर पर कॉल करने के बाद सामने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल से जुड़ा बताते हुए रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही।
कथित अस्पताल प्रतिनिधि ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर पीड़ित से कुछ निर्देशों का पालन करने को कहा। इसी दौरान साइबर ठगों ने उनके मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच बना ली। इसके बाद बैंक खातों से जुड़े विवरण का दुरुपयोग करते हुए दो अलग-अलग खातों से कुल डेढ़ लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।
जब खाते से रुपये कटने के मैसेज आए, तब पीड़ित को ठगी का पता चला।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रदीप वर्मा ने गोरखपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अस्पताल, बैंक या सरकारी संस्था का नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से ही प्राप्त करें। गूगल सर्च में दिखाई देने वाले हर नंबर पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन, केवाईसी या अन्य प्रक्रिया के नाम पर मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करने, स्क्रीन शेयर करने या ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक संबंधी जानकारी मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और ऐसी जानकारी किसी से साझा न करें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई है।
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