
लगातार हो रही बारिश के बीच आवारा कुत्तों का आतंक तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका असर जिला अस्पताल में भी साफ दिखाई दे रहा है। अस्पताल के वैक्सीनेशन कक्ष के बाहर प्रतिदिन लंबी कतारें लग रही हैं, जहां रोजाना 50 से अधिक डॉग बाइट के मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी इस बढ़ती समस्या की पुष्टि कर रहे हैं। जून महीने से अब तक जिला अस्पताल में एंटी रैबीज के कुल 2,425 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, जून से अब तक दर्ज एंटी रैबीज मामलों में सबसे अधिक 555 मामले डॉग बाइट के हैं।
इसके अलावा:
डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में आवारा जानवरों की गतिविधियां बढ़ने से ऐसे मामलों में तेजी आती है।
डॉग बाइट के सबसे अधिक मामले शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों से सामने आ रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
इन इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमते हैं, जिससे पैदल आने-जाने वाले लोगों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
कई लोगों ने बताया कि सुबह और देर रात काम पर आने-जाने के दौरान आवारा कुत्ते पीछा करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
बढ़ते मामलों का असर जिला अस्पताल के वैक्सीनेशन कक्ष में भी देखने को मिल रहा है। एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए मरीजों और उनके परिजनों की लंबी लाइनें लग रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए तथा बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
शहर में लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामलों के बीच नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में शिकायतों के बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हुई है। नागरिकों ने निगम से प्रभावी अभियान चलाने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार:
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