
Last updated: August 17th, 2026 at 12:30 pm
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार से 18 बंदियों को रिहा किया गया। रिहा किए गए बंदियों में जबलपुर के साथ-साथ आसपास के विभिन्न जिलों के बंदी शामिल हैं। सभी बंदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
जेल प्रशासन के अनुसार, जेल नियमों में निर्धारित प्रावधानों के तहत बंदियों के अच्छे आचरण और संतोषजनक व्यवहार को देखते हुए उनकी सजा में छूट दी गई। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें जेल से रिहा किया गया।
रिहा होने वाले 18 बंदियों में एक महिला बंदी भी शामिल है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद इन बंदियों को अब समाज की मुख्यधारा में लौटने और सामान्य जीवन शुरू करने का अवसर मिला है।
रिहाई के दौरान जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को भविष्य में अपराध से दूर रहने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटकर जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने और परिवार के साथ सकारात्मक शुरुआत करने की सीख दी।
जेल प्रशासन ने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बंदियों में सुधार की भावना विकसित करना भी है। अच्छे आचरण और जेल में संतोषजनक व्यवहार करने वाले पात्र बंदियों को नियमों के तहत सजा में छूट का लाभ दिया जाता है।
स्वतंत्रता दिवस पर जेल से रिहाई इन बंदियों के लिए नई शुरुआत का अवसर रही। रिहाई के बाद अब उन्हें अपने परिवार और समाज के बीच लौटकर जिम्मेदारी के साथ जीवन आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक और जेल प्रशासन की ओर से सभी रिहा हुए बंदियों को शुभकामनाएं दी गईं। अधिकारियों ने उन्हें भविष्य में कानून का पालन करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
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