
Last updated: June 17th, 2026 at 05:08 pm
जबलपुर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर, जब पूरे मध्य प्रदेश में शासकीय अवकाश घोषित था, तब भी शहर के अंजुमन इस्लामिया स्कूल के खुले रहने की खबर ने लोगों को चौंका दिया। अब यह मामला प्रशासन तक पहुंच चुका है और जांच की मांग उठ रही है।
महाराणा प्रताप जयंती प्रदेश में घोषित सरकारी छुट्टी है। ऐसे में स्कूलों के बंद रहने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन जबलपुर के अंजुमन इस्लामिया स्कूल में इस दिन पढ़ाई जारी रही।
सिर्फ एक शाखा ही नहीं, बल्कि मढ़ोताल समेत अंजुमन की अन्य शाखाओं के भी खुले रहने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने शिक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुज़म्मिल अली ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब राज्य सरकार द्वारा अवकाश घोषित किया गया है, तो सभी शिक्षण संस्थानों को उसका पालन करना चाहिए।
उन्होंने इस मामले की औपचारिक शिकायत जबलपुर कलेक्टर से की है। शिकायत में कहा गया है कि नियमों की अनदेखी कर स्कूल चलाना गलत है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
विवाद बढ़ने के बीच स्कूल प्रबंधन ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। प्रबंधन का कहना है कि अंजुमन इस्लामिया संस्था वक्फ कानून के अंतर्गत संचालित होती है।
उनके अनुसार, अवकाश का निर्धारण उसी कानून के प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। इसलिए उन्होंने किसी भी सरकारी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।
मामला अब प्रशासन के पास पहुंच चुका है। कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद इस पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जा सकती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्कूल संचालन नियमों के तहत हुआ या नहीं।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों के लिए अवकाश नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए।
कुछ लोग इसे नियमों की अनदेखी मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग स्कूल प्रबंधन के तर्क को भी सही ठहरा रहे हैं। ऐसे में यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, अगर प्रबंधन का पक्ष सही साबित होता है, तो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा सकती है।
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