होमघोटालानर्सिंग घोटाले का खामियाजा भुगत रहे छात्र, हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन; बोले—चार साल का कोर्स छह साल में भी पूरा नहीं हुआ

नर्सिंग घोटाले का खामियाजा भुगत रहे छात्र, हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन; बोले—चार साल का कोर्स छह साल में भी पूरा नहीं हुआ

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले का असर अब हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार
नर्सिंग घोटाले पर छात्रों का जबलपुर में प्रदर्शन, बोले- 6 साल में भी पूरा नहीं हुआ कोर्स

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले का असर अब हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को ग्वालियर, भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र जबलपुर पहुंचे और लंबित न्यायिक प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने हाईकोर्ट से मामले की शीघ्र सुनवाई कर आदेश जारी करने की मांग की, ताकि वर्षों से रुकी परीक्षाएं आयोजित हो सकें और उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

‘चार साल का कोर्स, छह साल में भी पूरा नहीं’

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि नर्सिंग का पाठ्यक्रम चार वर्ष में पूरा होना चाहिए था, लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बाद भी वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके हैं। उनका कहना है कि कोर्ट में हर सुनवाई के बाद नई तारीख मिल जाती है, जिससे अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है।

सुनवाई में देरी से बढ़ी चिंता

छात्रों के अनुसार, मामले की पिछली सुनवाई 3 जून को हुई थी, जबकि अगली सुनवाई 3 अगस्त के लिए निर्धारित की गई है। उनका कहना है कि लगातार मिल रही नई तारीखों के कारण परीक्षाएं और परिणाम दोनों अटके हुए हैं। छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस प्रक्रिया में फंसे हुए हैं और उनका शैक्षणिक सत्र कब पूरा होगा।

आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे छात्र

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने बताया कि लंबे समय से पढ़ाई पूरी न होने के कारण कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अभिभावकों ने बच्चों की शिक्षा पर अपनी जमा-पूंजी खर्च कर दी, लेकिन आज भी डिग्री और रोजगार का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। छात्रों का कहना है कि अनिश्चितता और मानसिक तनाव के कारण कई विद्यार्थी गंभीर अवसाद का सामना कर रहे हैं।

हाईकोर्ट से जल्द आदेश जारी करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने हाईकोर्ट से अपील की कि मामले की जल्द सुनवाई कर आवश्यक आदेश जारी किए जाएं, ताकि हजारों विद्यार्थियों की रुकी हुई परीक्षाएं संपन्न हो सकें और उनका शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य आगे बढ़ सके।

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