होमट्रेंडिंगकार्यकर्ताओं का “collectorate” पर प्रदर्शन: मानदेय में गड़बड़ी और बर्खास्तगी के विरोध में सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

कार्यकर्ताओं का “collectorate” पर प्रदर्शन: मानदेय में गड़बड़ी और बर्खास्तगी के विरोध में सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

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जबलपुर में आशा और पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
Jabalpur Collectorate में ASHA Workers का प्रदर्शन, मानदेय पर विरोध

जबलपुर में आशा और पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने मानदेय भुगतान में कथित अनियमितताओं, अधिकारियों के रवैये और एक आशा कार्यकर्ता को नौकरी से हटाए जाने के विरोध में नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

मानदेय भुगतान में गड़बड़ी का आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही संयुक्त मोर्चा की प्रदेश महासचिव पूजा कनौजिया ने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ता जिला और ब्लॉक स्तर पर पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही हैं, लेकिन उनके मानदेय के भुगतान में लगातार अनियमितताएं हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में फरवरी महीने का भुगतान किए बिना सीधे मार्च और अप्रैल का मानदेय जारी किया गया, जिससे भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि इस तरह की व्यवस्था से कार्यकर्ताओं के पारिश्रमिक में गड़बड़ी की आशंका बढ़ रही है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हर महीने वेतन पर्ची देने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि प्रत्येक महीने किए गए कार्य के बदले स्पष्ट वेतन पर्ची (Salary Slip) उपलब्ध कराई जाए, ताकि भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘पसीना सूखने से पहले मजदूरी’ के सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक माह की 5 तारीख तक पूरा मानदेय उनके खातों में पहुंचना चाहिए।

पनागर की आशा कार्यकर्ता को वापस रखने की मांग

प्रदर्शन के दौरान पनागर की एक आशा कार्यकर्ता को नौकरी से हटाए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

पूजा कनौजिया ने आरोप लगाया कि संबंधित मामले में पार्षद द्वारा माफीनामा दिए जाने के बावजूद अधिकारियों ने कार्यकर्ता को दोबारा काम पर नहीं रखा। उनका दावा है कि ऐसा अन्य आशा कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इस मामले में भी प्रशासन की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

मानदेय बढ़ाने और बजट में प्रावधान की मांग

कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार उनके मानदेय में बढ़ोतरी की जाए। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ताओं में बड़ी संख्या में विधवा और परित्यक्ता महिलाएं शामिल हैं, जिनके परिवार की आजीविका इसी मानदेय पर निर्भर है।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा सत्र का होगा घेराव

संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगामी विधानसभा सत्र के दौरान बड़े स्तर पर आंदोलन और घेराव किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है और जब तक समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।

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