
शहर की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक शास्त्री ब्रिज का स्वरूप जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। लगभग 68 वर्ष पुराने इस पुल को हटाकर उसकी जगह अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हाईटेक फोर-लेन ब्रिज बनाया जाएगा। बढ़ते यातायात और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तैयार की जा रही यह महत्वाकांक्षी परियोजना शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
रविवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम के साथ मौके का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नए पुल की तकनीकी रूपरेखा, निर्माण प्रक्रिया और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
शास्त्री ब्रिज जबलपुर के सबसे व्यस्त पुलों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिससे कई बार यातायात का दबाव बढ़ जाता है। मौजूदा पुल की उम्र और लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक को देखते हुए इसके पुनर्निर्माण की योजना तैयार की गई है।
निरीक्षण के बाद मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि नया पुल केवल ट्रैफिक की समस्या का समाधान नहीं करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर के विकास की नई पहचान भी बनेगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता सिंगल पिलर तकनीक होगी। इस तकनीक में पुल को सहारा देने के लिए कम संख्या में पिलरों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पुल के नीचे अधिक खुला स्थान उपलब्ध रहेगा।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि नीचे से गुजरने वाले यातायात पर कम प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम होगी।
इसके अलावा नया शास्त्री ब्रिज चार लेन का होगा, जिससे हजारों वाहन बिना किसी रुकावट के आवागमन कर सकेंगे।
परियोजना की तकनीकी रूपरेखा तैयार करने के लिए IIT रुड़की, IIT गुवाहाटी और CRRI (सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट), नई दिल्ली के विशेषज्ञ जबलपुर पहुंचे।
विशेषज्ञों ने पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूदा पुल की संरचना, यातायात दबाव और निर्माण संबंधी तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया। विशेषज्ञ दल में मोहित वर्मा, श्रीनिवास, कविता रविंदर, दिनेश यादव, गणेश कुमार, गोपाल सिंह और बोरासी शामिल रहे।
नया शास्त्री ब्रिज सिर्फ यातायात का माध्यम नहीं होगा, बल्कि शहर का एक नया आकर्षण भी बनेगा। पुल पर आधुनिक डेकोरेटिव एलईडी लाइटिंग लगाई जाएगी, जिससे रात के समय इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाएगी।
इसके साथ ही बिजली, इंटरनेट, केबल और अन्य यूटिलिटी सेवाओं के लिए विशेष यूटिलिटी डक्ट बनाए जाएंगे। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की केबल या पाइपलाइन बिछाने के लिए पुल को बार-बार खोदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
PWD मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि परियोजना से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक के अनुरूप पुल का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा हो, ताकि नागरिकों को जल्द बेहतर यातायात सुविधा मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नया शास्त्री ब्रिज शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाएगा। साथ ही यह जबलपुर के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान के रूप में भी उभरेगा।
बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए यह परियोजना आने वाले कई दशकों तक शहर की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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