होमट्रेंडिंगजुमे की छुट्टी और रविवार को क्लास विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, राज्य सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस

जुमे की छुट्टी और रविवार को क्लास विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, राज्य सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस

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जबलपुर में स्कूल की छुट्टियों और कक्षाओं के समय को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है।
स्कूल छुट्टी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को नोटिस

जबलपुर में स्कूल की छुट्टियों और कक्षाओं के समय को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। जुमे (शुक्रवार) को छुट्टी और रविवार को कक्षाएं लगाए जाने के मामले में शिकायतकर्ता के साथ कथित अभद्रता और पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला

मामला जबलपुर के एक स्कूल से जुड़ा है, जहां जुमे के दिन छुट्टी और रविवार को कक्षाएं संचालित करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस निर्णय को लेकर शिकायतकर्ता मुजम्मिल अली ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों और अभिभावकों को असुविधा हो रही है और यह निर्णय पारंपरिक शैक्षणिक व्यवस्था के विपरीत है।

बताया जा रहा है कि जब मुजम्मिल अली इस संबंध में अपनी शिकायत लेकर स्कूल परिसर पहुंचे, तो वहां उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अपमानित किया गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे निराश होकर उन्होंने न्यायालय की शरण ली और हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि यह केवल छुट्टियों का मामला नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता के साथ हुए दुर्व्यवहार और प्रशासनिक लापरवाही का भी मुद्दा है। उन्होंने कोर्ट से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।

हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कई पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करे।

इसके अलावा, अंजुमन इस्लामिया वक्फ कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद अनवर को भी नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, संबंधित स्कूल की प्रिंसिपल सबीना अंसारी को भी जवाब देने के लिए कहा गया है।

पुलिस को भी जवाब देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने लार्डगंज थाना पुलिस को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट जानना चाहता है कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की और यदि नहीं की, तो इसके पीछे क्या कारण थे।

यह निर्देश इस बात को दर्शाता है कि अदालत इस मामले को केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रही है।

10 अगस्त को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की है। तब तक सभी संबंधित पक्षों को अपना-अपना पक्ष और जवाब अदालत के सामने प्रस्तुत करना होगा।

संभावना है कि अगली सुनवाई में मामले की दिशा और स्पष्ट होगी और यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था और संवेदनशीलता का मुद्दा

यह मामला केवल छुट्टियों के निर्धारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा संस्थानों में संवेदनशीलता, संवाद और प्रशासनिक जवाबदेही का भी सवाल उठाता है। किसी भी शैक्षणिक संस्था में लिए गए निर्णयों का प्रभाव सीधे छात्रों और अभिभावकों पर पड़ता है, ऐसे में पारदर्शिता और सहमति बेहद जरूरी होती है।

साथ ही, यदि कोई अभिभावक या नागरिक अपनी शिकायत लेकर आता है, तो उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। इस मामले में लगे आरोप शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हैं।

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