
Last updated: June 17th, 2026 at 05:15 pm
जबलपुर में महाराणा प्रताप जयंती के दिन एक निजी स्कूल के खुले रहने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मालवीय चौक स्थित अंजुमन इस्लामिया स्कूल में शासकीय अवकाश के बावजूद कक्षाएं संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और शिक्षा व्यवस्था के नियमों पर सवाल उठने लगे हैं।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब छात्रों और अभिभावकों को पता चला कि अवकाश के दिन भी स्कूल खुला है। धीरे-धीरे यह खबर फैलती गई और फिर विरोध शुरू हो गया।
महाराणा प्रताप जयंती मध्यप्रदेश में घोषित शासकीय अवकाश है। इस दिन आमतौर पर सभी सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ अधिकतर निजी और सरकारी स्कूल भी बंद रहते हैं।
लेकिन अंजुमन इस्लामिया स्कूल में पढ़ाई जारी रहने की जानकारी ने लोगों को चौंका दिया। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा कि जब पूरे प्रदेश में अवकाश है, तो इस स्कूल में कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं।
कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भी हिंदू पर्वों और महापुरुषों की जयंती के अवसर पर घोषित छुट्टियों के दिन स्कूल संचालन की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस बार मामला खुलकर सामने आने से विवाद गहरा गया है।
मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी स्कूल पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों की अनदेखी बताया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नियमों का नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने जिला कलेक्टर से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विरोध के दौरान स्कूल परिसर के बाहर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बनी रही, हालांकि स्थिति को बाद में नियंत्रित कर लिया गया।
विवाद बढ़ता देख स्कूल प्रबंधन ने तत्काल निर्णय लेते हुए छात्रों को छुट्टी दे दी। अभिभावकों को सूचना भेजी गई और बच्चों को घर वापस भेजा गया।
इस बीच एक छात्र फैजान ने बताया कि उन्हें पहले मोबाइल संदेश के माध्यम से अगले दिन स्कूल आने की जानकारी दी गई थी। इसी सूचना के आधार पर छात्र स्कूल पहुंचे थे। लेकिन जब स्कूल में विवाद की स्थिति बनी, तो अचानक छुट्टी घोषित कर दी गई।
इस घटनाक्रम ने अभिभावकों को भी असमंजस में डाल दिया। कई अभिभावकों ने कहा कि उन्हें पहले से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
इस पूरे विवाद के बीच अब तक स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यही कारण है कि मामले को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
लोगों का कहना है कि प्रबंधन को इस विषय पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके। वहीं कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि प्रबंधन के पास अपने निर्णय के पीछे कोई वैधानिक कारण हो सकता है।
मामला अब जिला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है। भाजपा नेताओं द्वारा की गई शिकायत के बाद कलेक्टर स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि शासकीय नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित संस्था पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि स्कूल प्रबंधन अपने निर्णय को नियमों के तहत सही साबित करता है, तो मामला अलग दिशा ले सकता है।
इस घटना के बाद शहर में शिक्षा संस्थानों के लिए अवकाश नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी स्कूलों के लिए स्पष्ट और समान नियम होने चाहिए।
कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि निजी संस्थानों के लिए अवकाश नियमों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन क्यों नहीं है। इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी विवाद का कारण बन सकती हैं।
इस पूरे मामले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा। क्या प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा या स्कूल प्रबंधन का पक्ष सही साबित होगा?
फिलहाल सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक फैसले पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी स्पष्ट हो सकता है।
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