होमट्रेंडिंगगंगा दशहरा पर 900 फुट की चुनरी से हुआ बाणगंगा मैया का भव्य श्रृंगार, भेड़ाघाट में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गंगा दशहरा पर 900 फुट की चुनरी से हुआ बाणगंगा मैया का भव्य श्रृंगार, भेड़ाघाट में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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जबलपुर के प्रसिद्ध भेड़ाघाट क्षेत्र में गंगा दशहरा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
Bhedaghat में 900 फुट चुनरी से हुआ बाणगंगा मैया का श्रृंगार

जबलपुर के प्रसिद्ध भेड़ाघाट क्षेत्र में गंगा दशहरा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में 900 फुट लंबी चुनरी से बाणगंगा मैया, नर्मदा मैया और सरस्वती मैया का भव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

सुबह से ही घाट पर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन के साथ महाआरती, दुग्ध अभिषेक और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।

14वें वर्ष में आयोजित हुआ विशेष धार्मिक कार्यक्रम

हरे कृष्णा आश्रम द्वारा यह आयोजन लगातार 14वें वर्ष किया गया। आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने नदी तट पर विशेष सजावट की और 900 फुट की विशाल चुनरी अर्पित कर मां बाणगंगा का श्रृंगार किया।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और स्वच्छता की कामना की। आयोजकों ने नदियों को स्वच्छ रखने और समाज में नशामुक्ति का संदेश भी दिया।

बाणासुर और बाणगंगा की कथा भी सुनाई गई

आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को बाणगंगा से जुड़ी पौराणिक कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में बाणासुर नामक राक्षस ने इस क्षेत्र में तपस्या कर करोड़ों शिवलिंगों की पूजा की थी।

कथा के अनुसार जब बाणासुर उन शिवलिंगों को गंगा मैया में विसर्जित करने ले जा रहा था, तब भगवान शंकर ने उसे आशीर्वाद दिया कि जहां वह बाण मारेगा, वहीं से गंगा मैया का उद्गम होगा।

इसी मान्यता के कारण इस क्षेत्र का नाम पहले “बाढ़गंगा” पड़ा, जो समय के साथ “बैनगंगा” कहलाने लगा।

बिना प्राण प्रतिष्ठा के होती है शिवलिंग की पूजा

स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज ने यह भी बताया कि नर्मदा मैया से प्राप्त शिवलिंगों की अलग से प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाती। मान्यता है कि इनका पूजन पहले ही बाणासुर द्वारा किया जा चुका है, इसलिए सीधे पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाती है।

इस धार्मिक मान्यता को सुनने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे।

नदियों की स्वच्छता और नशामुक्ति का संदेश

कार्यक्रम से जुड़े शरद अग्रवाल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देना भी है।

उन्होंने कहा कि:

  • नदियां स्वच्छ रहें
  • क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहे
  • समाज में शांति कायम रहे
  • युवाओं में नशामुक्ति का संदेश पहुंचे

इसी भावना के साथ हर वर्ष यह आयोजन किया जाता है।

गंगा दशहरा का विशेष महत्व

गंगा दशहरा को मां गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। देशभर में श्रद्धालु नदियों और घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

भेड़ाघाट में आयोजित यह कार्यक्रम भी आस्था, संस्कृति और सामाजिक संदेश का बड़ा केंद्र बन गया। श्रद्धालुओं ने महाआरती में भाग लेकर मां गंगा और मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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