होमट्रेंडिंगबरगी बांध क्रूज हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पूरे मध्यप्रदेश में बोट क्लब और क्रूज संचालन पर लगी रोक

बरगी बांध क्रूज हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पूरे मध्यप्रदेश में बोट क्लब और क्रूज संचालन पर लगी रोक

-
जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ में महत्वपूर्ण
Screenshot 2026-05-13 130858

जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हादसे में हुई जनहानि और सुरक्षा व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले से जुड़ी तीन जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल पूरे मध्यप्रदेश में बोट क्लब और क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। साथ ही हादसे की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी गठित की गई है।

हाईकोर्ट में एक साथ हुई तीन जनहित याचिकाओं की सुनवाई

बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद इस मामले ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। हादसे में कई लोगों की मौत के बाद सुरक्षा मानकों और पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। इसी को लेकर अलग-अलग सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं द्वारा जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं।

मंगलवार को जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ में इन तीनों याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हादसे को “बेहद पीड़ादायक” बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि क्रूज संचालन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया। खराब मौसम और संभावित खतरे के बावजूद पर्यटकों को क्रूज में सवार कराया गया। इसके अलावा पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए।

राज्य सरकार ने बनाई हाई लेवल जांच कमेटी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि हादसे की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग गठित कर दिया गया है। यह कमेटी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि जांच समिति निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से जांच करेगी:

  • हादसे के वास्तविक कारण
  • मौसम संबंधी परिस्थितियां
  • सुरक्षा इंतजामों की स्थिति
  • लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता
  • जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका
  • क्रूज संचालन की अनुमति प्रक्रिया
  • पर्यटन विभाग और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही

सरकार ने यह भी कहा कि प्रदेश में संचालित सभी बोट क्लब और क्रूज सेवाओं का व्यापक ऑडिट कराया जाएगा। जांच आयोग को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही के आरोप

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने हादसे के समय बरती गई कथित लापरवाही का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। कोर्ट में बताया गया कि यात्रियों को समय पर लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गईं। आरोप यह भी लगाया गया कि कई लाइफ जैकेट लॉक अलमारी में रखी थीं और हादसे के समय अफरा-तफरी के बीच उन्हें निकालने में देरी हुई।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि:

  • बच्चों के लिए पर्याप्त लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थीं।
  • कई जैकेट निम्न गुणवत्ता की थीं।
  • सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।
  • पुराने और कथित रूप से जर्जर क्रूज का संचालन जारी था।
  • मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज को जलाशय में भेजा गया।

हादसे से जुड़े कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें यात्रियों को डर और अव्यवस्था की स्थिति में देखा गया। इससे प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

प्रशासन / पुलिस / अधिकारियों का पक्ष

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार की ओर से कहा गया कि फिलहाल पूरे प्रदेश में क्रूज और बोट संचालन पर रोक लगा दी गई है ताकि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा सके।

सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि:

  • न्यायिक आयोग स्वतंत्र रूप से जांच करेगा।
  • सुरक्षा मानकों के लिए नया SOP तैयार किया जाएगा।
  • भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत की जाएगी।
  • प्रदेश के जलाशयों और पर्यटन स्थलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हादसे के दौरान जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने वाले स्थानीय मजदूरों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों को सम्मानित करने पर विचार किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों / विशेषज्ञों / प्रभाव section

बरगी क्रूज हादसे ने पूरे प्रदेश में पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा इंतजामों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार जल पर्यटन से जुड़े संचालन में निम्न व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए:

  • मौसम की रियल टाइम मॉनिटरिंग
  • प्रशिक्षित क्रू सदस्य
  • पर्याप्त और प्रमाणित लाइफ जैकेट
  • आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम
  • नियमित तकनीकी निरीक्षण
  • क्षमता से अधिक यात्रियों को अनुमति न देना

कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट नियमित रूप से कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई हो।

इस हादसे के बाद प्रदेश के अन्य जल पर्यटन केंद्रों पर भी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो यह मामला भविष्य की पर्यटन नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

बरगी बांध क्रूज हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार द्वारा न्यायिक जांच आयोग गठित किए जाने को मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और किन स्तरों पर चूक हुई। फिलहाल पूरे प्रदेश में क्रूज और बोट संचालन पर रोक लगाना यह संकेत देता है कि सरकार अब जल पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख अपनाने की तैयारी में है।

समाचार मुख्य आकर्षण

आपको यह भी पसंद आ सकता है

No Comments