
Last updated: May 7th, 2026 at 11:47 am
संस्कारधानी जबलपुर के ग्वारीघाट थाने में पुलिस विभाग की मर्यादाओं को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अनुशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले विभाग के भीतर ही उस समय हड़कंप मच गया, जब एक आरक्षक ने थाना प्रभारी (TI) के साथ अभद्रता करते हुए उनकी कॉलर पकड़ ली। घटना के बाद पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) संपत उपाध्याय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया है और जांच के आदेश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्वारीघाट थाना प्रभारी हरिकिशन आटनेरे थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों की नियमित गणना ले रहे थे। इस दौरान वे कर्मचारियों को उनके कार्यों और जिम्मेदारियों को लेकर दिशा-निर्देश दे रहे थे।
इसी बीच जब थाना प्रभारी ने आरक्षक अजय लोधी को उसके कार्य को लेकर टोकते हुए कुछ निर्देश दिए, तो वह अचानक भड़क गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सामान्य बातचीत कुछ ही देर में तीखे विवाद में बदल गई।
बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी द्वारा अनुशासन में रहकर बात करने की समझाइश दिए जाने के बाद आरक्षक अजय लोधी अपना आपा खो बैठा। उसने थाना प्रभारी के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और झपटकर उनकी कॉलर पकड़ ली।
थाने के भीतर हुई इस घटना को देखकर वहां मौजूद अन्य उप निरीक्षक (SI) और पुलिसकर्मी हैरान रह गए। स्थिति को बिगड़ता देख तत्काल अन्य स्टाफ ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। हालांकि, आरोप है कि आरक्षक इसके बाद भी अभद्र व्यवहार करता रहा।
घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी हरिकिशन आटनेरे ने पूरे मामले से पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय को अवगत कराया। मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए एसपी ने तुरंत आरोपी आरक्षक अजय लोधी को लाइन हाजिर करने के आदेश जारी कर दिए।
साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद किन परिस्थितियों में इतना बढ़ा।
अपने ही वरिष्ठ अधिकारी के साथ थाने के भीतर हुई इस तरह की घटना ने पुलिस विभाग की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस बल जैसे अनुशासित विभाग में इस प्रकार की घटनाएं विभागीय छवि को प्रभावित करती हैं और आम जनता के बीच भी गलत संदेश पहुंचाती हैं।
पुलिस विभाग में वरिष्ठ और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच संवाद और अनुशासन दोनों का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक माना जाता है।
घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कह रहा है।
ग्वारीघाट थाने में सामने आया यह मामला केवल एक विवाद नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और कार्यसंस्कृति से जुड़े गंभीर सवालों को उजागर करता है। अब सभी की नजर विभागीय जांच पर टिकी है कि दोषी के खिलाफ क्या अंतिम कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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