
Last updated: October 6th, 2026 at 03:25 pm
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) जबलपुर में कुलसचिव पद पर बार-बार बदलाव को लेकर विश्वविद्यालय के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। बीते करीब पौने तीन साल के दौरान विश्वविद्यालय में छह कुलसचिव बदले जा चुके हैं। अब डीके बग्गा को कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डीके बग्गा वर्तमान में विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक दायित्वों में कार्यरत हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनकी सेवानिवृत्ति में करीब छह महीने का समय बाकी है। ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को स्थिर रखने और लंबित कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती रहेगी।
आरडीवीवी में कुलसचिव का पद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। कुलसचिव के स्तर पर परीक्षा, प्रशासनिक कार्य, कर्मचारियों से जुड़े मामले और विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे कई कार्य जुड़े होते हैं।
ऐसे में कम समय के अंतराल पर इस पद पर बदलाव होने से प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता प्रभावित होने की बात सामने आती रही है।
बीते करीब पौने तीन वर्षों में छह कुलसचिवों का बदलाव होने के बाद अब डीके बग्गा को यह जिम्मेदारी दी गई है। उनके सामने विश्वविद्यालय में चल रहे प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
कुलसचिव पद पर बार-बार बदलाव को लेकर कुछ छात्रों ने चिंता जताई है। छात्रों का कहना है कि प्रशासनिक पदों पर लगातार बदलाव होने से उन्हें अपनी समस्याओं और लंबित मामलों के लिए नए अधिकारियों के साथ दोबारा समन्वय करना पड़ता है।
छात्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्तर पर स्थिरता रहने से कामकाज को गति मिल सकती है। उनका कहना है कि बार-बार अधिकारियों के बदलने से कुछ प्रक्रियाओं में देरी होने की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, प्रशासनिक बदलावों का विश्वविद्यालय के कामकाज पर वास्तविक प्रभाव किस स्तर तक पड़ा है, यह संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और लंबित मामलों के आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
डीके बग्गा के सामने अब सीमित अवधि में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। उनकी सेवानिवृत्ति में करीब छह महीने का समय बताया जा रहा है।
इस दौरान छात्रों और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों के साथ-साथ विश्वविद्यालय की नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण रहेगा।
कुलसचिव पद पर नए बदलाव के बाद अब विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्थिरता कितनी बनी रहती है और लंबित कार्यों को कितनी गति मिलती है, इस पर छात्रों और कर्मचारियों की नजर रहेगी।
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